हरियाणा: 590 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में सरकार सख्त, 4 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी गठित

हरियाणा में IDFC फर्स्ट बैंक में हुए 590 करोड़ रुपये के वित्तीय धोखाधड़ी मामले ने तूल पकड़ा है. सरकार ने विपक्ष के सवालों के बीच तुरंत चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है. मुख्यमंत्री ने 24 घंटे में 556 करोड़ रुपये की वसूली की जानकारी दी है.
हरियाणा में इन दिनों आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला गरमाया हुआ है. इसको लेकर सरकार पर भी विपक्ष की तरफ से सवाल खड़े किए गए थे. वहीं इस मामले पर सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है.
सरकार की तरफ से बनाई गई इस कमेटी में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता समेत तीन अधिकारियों को शामिल किया गया है. ये अधिकारी पूरे मामले की जांच करेंगे. जांच पूरी होने के बाद पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी.
कौन-कौन है जांच कमेटी में शामिल
सरकार की तरफ से जो जांच कमेटी बनाई गई है, उसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता, विकास एवं पंचायत निदेशक अनीश यादव, नगर निगम आयुक्त पंचकूला विनय कुमार, हरियाणा लोक सेवा आयोग उप सचिव सतीश कुमार को शामिल किया गया है.
ये जांच समिति राज्य की बैंकिंग पॉलिसी के अलग-अलग नियमों और उन्हें लागू करने की जांच करेगी. हरियाणा सरकार की तरफ से जांच कमेटी को जांच पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है.
अब तक 556 की राशि रिकवर- सरकार
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा विधानसभा के जारी बजट सत्र के दौरान सदन में जानकारी दी है कि सिर्फ 24 घंटे के अंदर ही हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank से गबन की गई राशि को रिकवर कर लिया है. 590 करोड़ रुपए में से 556 करोड़ रुपए हरियाणा सरकार के अन्य बैंकों के खातों में IDFC बैंक के द्वारा ट्रांसफर कर दिए गए हैं
हर एंगल से होगी जांच
वित्त सचिव की अध्यक्षता में इस पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है. हाई लेवल कमेटी जो आगे भी इस मामले की जांच जारी रखेगी. ताकि पता लग सके कि बैंक कर्मचारियों के साथ कहीं हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों के अधिकारी या कर्मचारी तो इस गबन की सांठगांठ में शामिल नहीं थे.











