कही-सुनी (01 MARCH-26) : क्या छत्तीसगढ़ में भी शराब घोटाले में फंसे लोग पाक-साफ़ हो जाएंगे ?


रवि भोई की कलम से
शराब घोटाले में फंसे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के निचली अदालत से बरी होने के बाद छत्तीसगढ़ में भी चर्चा चल पड़ी है कि यहां भी शराब घोटाले में फंसे नेता और अफसर बेदाग छूट जाएंगे। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, भूपेश सरकार के आबकारी मंत्री कवासी लखमा और कई अफसरों को जमानत मिल गई है। कवासी लखमा विधानसभा के बजट सत्र में शामिल भी हो रहे हैं। आबकारी सचिव निरंजन दास, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और कुछ लोग जरूर अभी जेल में हैं। कहा जा रहा है राज्य में भाजपा सरकार बनने के तत्काल बाद हाइप क्रिएट करने के लिए जांच एजेंसियां आनन-फानन में कार्रवाई की, पर समय के साथ मामला ठंडा पड़ता गया। अब केजरीवाल मामले में कोर्ट के फैसले से जांच एजेंसी ही कटघरे में आ गई है, कहीं छत्तीसगढ़ में भी ऐसा न हो।
बस्तर महाराजा राज्यसभा की दौड़ में
कहते हैं कि बस्तर के महाराजा कमलचंद्र भंजदेव भाजपा के कोटे से राज्यसभा में जाने की जुगत में हैं। डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में कमलचंद्र भंजदेव युवा आयोग के अध्यक्ष रहे हैं। चर्चा है कि इस बार छत्तीसगढ़ से सामान्य या अन्य पिछड़ा वर्ग से ही राज्यसभा में भेजा जाएगा। बस्तर में नक्सलवाद के सफाए के लिए जिस तरह अभियान चलाया जा रहा है और बस्तर के विकास की बात की जा रही है,उससे आंकलन किया जा रहा है कि बस्तर को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके अलावा राज्य की भाजपा सरकार में अभी बस्तर से एक मात्र मंत्री केदार कश्यप हैं, हालांकि बस्तर से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव हैं। सुनने में आ रहा है कि महाराजा कमलचंद्र भंजदेव दिल्ली के एक बड़े भाजपा नेता और आर एस एस के कुछ नेताओं से राज्यसभा के लिए एप्रोच लगवा रहे हैं। बताते हैं कि उनके अभियान के खिलाफ बस्तर भाजपा का एक वर्ग खड़ा हो गया है। यह वर्ग भाजपा या आर एस एस के पुराने नेता या कार्यकर्ता को उच्च सदन में भेजने की वकालत कर रहा है। भाजपा के कोटे से इस बार एक प्रतिनिधि राज्यसभा में जाएगा। अब देखते हैं दिल्ली दरबार क्या फैसला लेता है।
डिप्टी कलेक्टरों को पीछे छोड़ आईएएस बने तरुण
एलाइड सर्विस से आईएएस अफसर बने तरुण कुमार किरण ने कई डिप्टी कलेक्टरों को पीछे छोड़ दिया है। बताते हैं तरुण कुमार किरण 2014 के जीएसटी अफसर हैं और 12 साल की सेवा में ही आईएएस बन गए। जबकि अभी 2013 बैच के कई डिप्टी कलेक्टर आईएएस बनने की कतार में हैं। 2013 बैच के सुमित अग्रवाल, संदीप अग्रवाल और आशीष टिकरिहा ही आईएएस प्रमोट हो पाए हैं। 2013 बैच के बाकी रह गए राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस बनने में दो-तीन साल लगेंगे। 2014 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को जब तक आईएएस मिलेगा तब तक तरुण कुमार किरण बहुत आगे निकल गए होंगे और उनसे वरिष्ठ आईएएस भी हो जाएंगे। सरकार ने आईएएस का तमगा मिलने के बाद सरकार ने तरुण कुमार किरण को कोरबा कलेक्ट्रेट में ओएसडी बनाया है। कोरबा औद्योगिक नगरी है और एसईसीएल का भी वहां बड़ा कारोबार है, ऐसे में सरकार तरुण कुमार किरण की विशेषज्ञता का लाभ कैसे लेती है, यह देखना है। वैसे बताते हैं तरुण कुमार किरण जीएसटी अफसर बनने से पहले फ़ूड इंस्पेक्टर और महिला बाल विकास अधिकारी भी रह चुके हैं। माना जा रहा है कि तरुण कुमार किरण की सेवा अवधि के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में 2021 का बैच मिल सकता है।
क्या मोहन मरकाम की लाटरी लगेगी ?
कहते हैं छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मोहन मरकाम बड़े जोर-शोर से राज्यसभा की कुर्सी पाने में लगे हैं। छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के कोटे से एक नेता को राज्यसभा जाने का मौका मिलेगा। कांग्रेस के कोटे से राज्यसभा सदस्य रहे केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम के अप्रैल में कार्यकाल खत्म होने से दो सीट रिक्त हो रही है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा को मिलेगी। माना जा रहा है कांग्रेस इस बार बाहरी नेता की जगह छत्तीसगढ़िया को ही मौका देगी। अभी गैर छत्तीसगढ़िया रहवासी राजीव शुक्ला और रंजीता रंजन कांग्रेस के कोटे से राज्यसभा सांसद हैं। वैसे कांग्रेस के कोटे से राज्यसभा के दावेदारों में टीएस सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू का नाम भी चर्चा में है। कुछ लोग भूपेश बघेल का नाम भी चला रहे हैं, तो सिक्ख समाज पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा के नाम को आगे कर रहा है। कुछ लोग फूलोदेवी नेताम के रिपीट होने की संभावना भी जता रहे हैं।
विधानसभा सत्र के बाद मंत्रालय में बदलाव के आसार
कहा जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद राज्य में प्रशासनिक फेरबदल हो सकता है। मंत्रालय में सचिवों और विभागाध्यक्षों में हेरफेर के साथ कुछ जिलों के कलेक्टर बदले जाएंगे। कई सचिव और विभागाध्यक्ष दो-सवा दो साल से एक ही विभाग में पदस्थ हैं। कुछ जिलों में कलेक्टर भी साय सरकार के कार्यकाल से चल रहे हैं। दीपक सोनी के भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने के कारण राज्य सरकार ने 2014 बैच के आईएएस कुलदीप शर्मा को बलौदाबाजार-भाटापारा का कलेक्टर बना दिया है। कुलदीप शर्मा अभी तक पंजीयक सहकारी संस्थाएं थे। सरकार ने हाल ही में आईएएस बनने वाले राज्य प्रशासनिक सेवा और एलाइड सर्विस के अफसरों की पोस्टिंग की है। कुछ अफसरों को पुराने पद पर यथावत रखा है, लेकिन तीर्थराज अग्रवाल और आशीष टिकरिहा की पोस्टिंग चर्चा में है। ये दोनों मंत्री के स्टाफ में थे। तीर्थराज अग्रवाल वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी थे तो आशीष टिकरिहा वित्त मंत्री ओपी चौधरी के ओएसडी। इनमें तीर्थराज को योजना और आर्थिक सांख्यिकीय विभाग का उप सचिव बनाकर मंत्रालय में भेज दिया गया है, तो आशीष टिकरिहा को वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन का एमडी बनाकर पुरस्कृत कर दिया गया है। एमडी के तौर पर आशीष वेयर हाउसिंग कार्पोरेशनके प्रशासनिक मुखिया रहेंगे, जबकि तीर्थराज को स्वतंत्र प्रभार नहीं दिया गया है।
जीएस मिश्रा को निष्ठा का ईनाम
कहा जा रहा है रिटायर्ड आईएएस और भाजपा नेता गणेशशंकर मिश्रा को निष्ठा का ईनाम मिला है। सरकार ने गणेशशंकर मिश्रा को नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनाया है। डिप्टी कलेक्टर से आईएएस बने गणेशशंकर मिश्रा बस्तर और राजनांदगांव जैसे जिले के कलेक्टर और कई विभागों के सचिव रहे। रायपुर नगर निगम के कमिश्नर से लेकर कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल के पीएस की भूमिका निभा चुके गणेशशंकर को रमनसिंह की सरकार ने राज्य सहकारी निर्वाचन आयुक्त बनाया था। भूपेश बघेल की सरकार में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद गणेशशंकर ने भाजपा ज्वाइन कर लिया। बताते हैं गणेशशंकर मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव में धरसींवा विधानसभा से भाजपा की टिकट चाहते थे, पार्टी ने छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार पद्मश्री अनुज शर्मा को वहां से उम्मीदवार बना दिया। कहते हैं चुनाव के वक्त भाजपा ने गणेशशंकर मिश्रा कई फ्रंट पर उपयोग किया। भाजपा ने पार्टी टिकट के दावेदार अंजय शुक्ला को छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर खुश करने की कोशिश की है।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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