महादेव एप मामले में हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत : फ्रीज शेयर बेचने की मंजूरी; निकाली गई राशि पर रोक बरकरार

बिलासपुर, 04 जून 2026। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए फ्रीज किए गए करीब 423 करोड़ रुपए मूल्य के शेयरों की वैल्यू सुरक्षित रखने के लिए कंपनियों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए फ्रीज किए गए शेयरों की कीमत गिरने से भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने आदेश दिया कि संबंधित कंपनियां फ्रीज किए गए शेयरों को बेचकर प्राप्त राशि को ED की निगरानी में सुरक्षित म्यूचुअल फंड या सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश कर सकती हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस राशि पर कंपनियों का कोई अधिकार नहीं होगा और पूरी रकम ED के नियंत्रण में रहेगी।
क्या है मामला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वर्ष 2022 में महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा एप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच शुरू की थी। जांच के दौरान एजेंसी को जानकारी मिली कि कथित अवैध कमाई को कोलकाता के कारोबारी हरि शंकर टिबरेवाल और सूरज चोखानी के जरिए विभिन्न कंपनियों में निवेश किया गया।
ED के अनुसार, इस धनराशि का उपयोग शेयर बाजार में निवेश के लिए किया गया था। इसके बाद 28 फरवरी 2024 को एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए आठ कंपनियों के डीमैट और ट्रेडिंग खाते फ्रीज कर दिए थे। उस समय इन खातों में मौजूद शेयरों की कुल कीमत लगभग 423.60 करोड़ रुपए आंकी गई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत किसी संपत्ति को फ्रीज या अटैच करने का उद्देश्य उसकी वास्तविक कीमत को सुरक्षित रखना होता है। यदि बाजार में गिरावट के कारण संपत्ति का मूल्य कम हो जाए तो फ्रीज करने का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि कंपनियां केस जीतती हैं या सरकार संपत्ति जब्त करती है, दोनों ही स्थितियों में संपत्ति की वास्तविक वैल्यू सुरक्षित रहना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि ED कोई निवेश प्रबंधन एजेंसी नहीं है, लेकिन संपत्ति के मूल्य को बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।
एक्सपर्ट व्यू
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में फ्रीज की गई वित्तीय संपत्तियों के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। इससे जांच एजेंसियों और अदालतों को भविष्य में ऐसी संपत्तियों की वैल्यू सुरक्षित रखने के लिए व्यावहारिक समाधान अपनाने का रास्ता मिलेगा।










