इंदौर बीआरटीएस हटाने में लापरवाही पर हाई कोर्ट सख्त, कहा- समझ नहीं आता कि काम कैसे हो रहा है?

इंदौर। बीआरटीएस हटाने के मामले में चल रही लापरवाही पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। तल्ख टिप्पणी करते कोर्ट ने कहा कि समझ नहीं आता कि काम कैसे हो रहा है। जब भोपाल में तय समय में बीआरटीएस हट गया तो यहां क्या दिक्कत है। यहां एजेंसी तय करने में ही इतना समय लग गया।
कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर कलेक्टर और निगमायुक्त व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें और बताएं कि वास्तविक स्थिति क्या है। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि बीआरटीएस और बस स्टॉप हटाने के काम के लिए आठ एजेंसियां तय कर दी हैं। दो माह में काम पूरा हो जाएगा।
इस पर कोर्ट ने कहा कि आप तुरंत स्टेटस रिपोर्ट पेश करें और उसकी कापी पक्षकारों को भी उपलब्ध कराएं। मामले में अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। बीआरटीएस को लेकर चल रही याचिका के साथ ही कोर्ट ने शहर के बदहाल यातायात को लेकर चल रही अन्य याचिकाओं की सुनवाई भी की।
शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था और बीआरटीएस को लेकर हाई कोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। बुधवार को न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष इन याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
सुनवाई शुरू होते ही सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि बीआरटीएस हटाने के लिए टेंडर बुलवाए थे। आठ एजेंसियां तय हो गई हैं। बहुत जल्दी बीआरटीएस और बस स्टाप हटाने का काम पूरा हो जाएगा। कोर्ट ने काम की सुस्त गति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे तो कभी नहीं हो पाएगा। आपको कुछ समय सीमा तो तय करना पडेगी।
सरकारी वकील ने कोर्ट से गुहार लगाई कि मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में रख लें, तब तक बीआरटीएस हटाने का काम बहुत कुछ हो जाएगा, इस पर कोर्ट ने कहा कि हम ऐसा नहीं कर सकते। आप स्थिति स्पष्ट करते हुए रिपोर्ट पेश करें।
हाई कोर्ट में चली सुनवाई की बानगी
कोर्ट – काम की क्या स्थिति है।
सरकारी वकील- बीआरटीएस हटाने के लिए एजेंसी तय हो गई है। भंवरकुआ, भोलाराम नगर और राजीव गांधी चौराहा के बस स्टाप हटाने का काम हो भी गया है। दो जगह काम चल रहा है। बीआरटीएस और बस स्टाप हटाने के लिए आठ एजेंसियों को काम सौंपा है।
कोर्ट – भोपाल में तय समय में हट गया था, यहां क्या दिक्कत आ रही है।
सरकारी वकील – काम चल रहा है। सर हम स्टेटस रिपोर्ट पेश कर देंगे।
कोर्ट – मामले में 11 मार्च को अगली सुनवाई होगी। कलेक्टर और निगमायुक्त व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे।
हम सिर्फ यह चाहते हैं कि जनता परेशान नहीं हो शहर के बदहाल यातायात को लेकर चल रही जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विनय झेलावत ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद शहर में यातायात सुधार की दिशा में काम शुरू हो हुआ है, लेकिन बहुत कुछ करना अब भी बाकी है। जब तक लगातार बैठकें नहीं होंगी, नीति नहीं बनेगी तब तक कुछ नहीं होगा।
इस पर कोर्ट ने इस मामले में निगम की ओर से नोडल अधिकारी बनाए गए एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से पूछ कि निगम में कितने इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया 150। इस पर कोर्ट ने कहा कि बावजूद इसके रिमूवल क्यों नहीं होता। शहर का यातायात अस्त-व्यस्त क्यों है। हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि जनता परेशान नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने नोडल अधिकारी से कहा कि वे समय-समय पर कोर्ट द्वारा गठित समिति के साथ बैठक करें।
पुलिस ही कर रही अतिक्रमण
बुधवार को भवरकुआ पुलिस थाने के बाहर अतिक्रमण के मुद्दे पर भी सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने कोर्ट को बताया कि पूरे शहर में पार्किंग के नाम पर बनाए गए बेसमेंट में व्यवसायिक गतिविधियां चल रही हैं। बेसमेंट में पार्किंग सुनिश्चित कर दी जाए तो सड़क पर वाहन पार्क होना बंद हो जाएंगे।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि भवरकुआ पुलिस खुद थाने के बाहर तक अतिक्रमण किए हुए है। जब्त वाहन सड़क पर खड़े रहते हैं। इस पर कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता बागडिया से कहा कि वे अगली सुनवाई पर बताएं कि सुप्रीम कोर्ट के जब्त वाहनों को लेकर क्या दिशा निर्देश हैं।