रीवा: कलेक्ट्रेट के सामने हाईवोल्टेज ड्रामा; कुत्ते को पहनाया ज्ञापन, 3 घंटे थमी शहर की रफ्तार

रीवा: यूजीसी की मांगों को लेकर गुढ़ क्षेत्र के दिग्गज नेताओं और ओबीसी-भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सोमवार की दोपहर 1 बजे को शहर की सड़कों पर जमकर उत्पात मचाया. प्रदर्शनकारियों ने न केवल मुख्य मार्ग पर 3 घंटे तक चक्काजाम किया, बल्कि विरोध प्रदर्शन के दौरान मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए एक कुत्ते को ‘कलेक्टर’ बताकर उसे ज्ञापन पहना दिया. इस दौरान आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और एम्बुलेंस तक को रास्ता नहीं मिला.

कलेक्टर की जिद पर अड़े रहे नेता

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता कुंवर सिंह और समाजसेवी विश्वनाथ पटेल ‘चोटी वाला’ इस बात पर अड़े रहे कि वे सिर्फ कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपेंगे. मौके पर पहुंचे अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी, एसडीएम अनुराग तिवारी और नायब तहसीलदार यतीक शुक्ला ने काफी मिन्नतें कीं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से साफ मना कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

कुत्ते को बनाया ‘प्रतीकात्मक कलेक्टर’

प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज प्रदर्शनकारियों ने एक आवारा कुत्ते को पकड़ा और उसे रीवा कलेक्टर का नाम देते हुए उसके गले में ज्ञापन की माला डाल दी. इसके बाद भीड़ कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर दाखिल होने का प्रयास की मगर पुलिस ने वही रोक दिया और कुत्ते को वही गेट के अंदर छोड़ दिया. इस अजीबोगरीब प्रदर्शन को देख वहां मौजूद पुलिस बल और अधिकारी भी अवाक रह गए.

मानवता शर्मसार: एम्बुलेंस फंसी, जनता से अभद्रता

आंदोलन के नाम पर शहर की व्यवस्था को बंधक बना लिया गया. जाम में फंसी महिलाओं और बच्चों ने जब रास्ता मांगा, तो प्रदर्शनकारियों ने उनके ऊपर पानी की बोतलें फेंकी और बदतमीजी की. कई एम्बुलेंस जाम में घंटों फंसी रहीं, जिससे गंभीर मरीजों की जान खतरे में पड़ गई. गलियों से रास्ता खोजने की कोशिश कर रहे लोगों को भी भारी परेशानी हुई, क्योंकि पूरे शहर का यातायात ठप हो चुका था.

पुलिस की लाचारी पर उठे सवाल

शहर की मुख्य सड़कों पर 3 घंटे तक चले इस तांडव के दौरान पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना रहा. घंटों तक जाम लगा रहा, लेकिन प्रशासन भीड़ को हटाने की हिम्मत नहीं जुटा सका. इस घटना के बाद अब शहर के प्रबुद्ध नागरिक विरोध के इस तरीके और जनता को हुई असुविधा पर सवाल उठा रहे हैं. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि बिना परमिशन के सड़कों पर जाम लगाकर आवा गमन बाधित करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही करती है या फिर इस मामले को यहीं पर दबा दिया जाता है.

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