होर्मुज के साथ-साथ अगर दुनिया में आई शांति, तो कहां तक पहुंच सकता है भारतीय मार्केट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि 14 जून 2026 को यूएस और ईरान के बीच में डील हो जाएगी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुल जाएगा. 28 फरवरी 2026 से जब से ईरान और इजराइल के बीच जंग शुरू हुई और फिर अमेरिका जब उसमें कूदा तो पूरी दुनिया को उसका खामियाजा भुगतना पड़ा. खासतौर पर भारत जैसे देश को जो कि अपनी एनर्जी आपूर्ति पर लगभग पूरी तरीके से आयात पर निर्भर है. अब जब यह खबर आ रही है कि दोनों देशों के बीच डील हो जाएगी और शांति स्थापित होगी तो उसका असर भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा आइए उसे समझने की कोशिश करते हैं.
असल में जब यह खबर चलने लगी की ईरान और अमेरिका के बीच डील होने वाली है तो 12 जून को भारतीय शेयर बाजार में बंपर तेजी देखने को मिली मार्केट का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 17,00 अंक की तेजी के साथ बंद हुआ. ऐसे में जब डील की सुगबुगाहट मात्र से बाजार इतना हराभरा हो गया तो सवाल बनता है कि अगर होर्मुज खुल जाए और दुनिया में शांति का माहौल हो तो भारतीय शेयर बाजार कहां तक जाएगा? संभावित समझौते के संकेतों ने बाजार में एक जबरदस्त उछाल पैदा किया, जो दर्शाता है कि यदि दुनिया में स्थायी शांति स्थापित होती है, तो भारतीय शेयर बाजार अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए एक नए ऐतिहासिक शिखर की ओर बढ़ सकता है.
होर्मुज खुलने के समाचार से बाजार में रिकॉर्ड उछाल
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी 12 जून 2026 को जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने और होर्मुज जलमार्ग को वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोलने के मसौदे की घोषणा की, भारतीय शेयर बाजार ने पिछले दो महीनों की सबसे बड़ी रैली दर्ज की. एक दिन में 30 शेयरों वाला बीएसई (BSE) सेंसेक्स 1,695.40 अंक (+2.30%) की भारी बढ़त के साथ 75,527.95 के स्तर पर बंद हुआ. दिन के कारोबार के दौरान सूचकांक 1,775.47 अंक तक उछलकर 75,608.02 के उच्च स्तर पर पहुंच गया था. इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 461.30 अंक (+1.99%) की तेजी के साथ 23,622.90 के स्तर पर बंद हुआ. इससे संकेत साफ है कि अगर डील हुई तो बाजार को बूस्ट मिल सकता है.
कच्चे तेल से लेकर भारतीय रुपये पर होगा असर
वैश्विक तनाव समाप्त होने से भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को गति देने वाले प्रमुक कारकों पर असर देखने को मिल सकता है. इसमें प्रमुख कच्चा तेल और भारतीय रुपया है. डील की खबरों के बीच जब शेयर बाजार में तेजी आई तब कच्चा तेल गिरा और रुपया मजबूत हो गया. आगे भी ये फैक्टर्स इकोनॉमी को सपोर्ट कर सकते हैं.
शांति स्थापित होने पर कहां तक जा सकता है बाजार?
पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध छिड़ने के बाद बाजार में लगातार बिकवाली हावी रही और सूचकांक गिरकर 73,000 के स्तर तक सुधर गए थे. विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज संकट टलने और वैश्विक शांति स्थापित होने पर भारतीय बाजार न केवल 86,000 के अपने पिछले शिखर को पार करेगा, बल्कि आने वाले महीनों में नए मील के पत्थर स्थापित करेगा. यदि विश्व स्तर पर स्थायी शांति स्थापित होती है और कच्चे तेल की सप्लाई बनी रहती है, तो वैश्विक ब्रोकरेज हाउसों ने भारतीय शेयर बाजार के लिए अत्यधिक हाई लक्ष्य निर्धारित किए हैं. मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि यदि कच्चा तेल $70 प्रति बैरल से नीचे रहता है और भारत की कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ 19% तक पहुंचती है, तो सेंसेक्स 1,07,000 के स्तर को छू सकता है. वहीं इनका “बेस केस” (50% संभावना) सेंसेक्स को 95,000 के स्तर पर देखता है.











