डेटा हब बनने की राह पर भारत, ₹5 लाख करोड़ निवेश से बदलेगी डिजिटल तस्वीर

भारत का डेटा सेंटर सेक्टर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहेगा और चालू कैलेंडर वर्ष में इसमें 54 अरब डॉलर से अधिक यानी 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश आ सकता है. रियल एस्टेट सलाहकार सीबीआरई ने यह अनुमान लगाया है. सीबीआरई ने अपनी रिपोर्ट ‘इंडिया अल्टरनेट सेक्टर्स आउटलुक 2026’ जारी करते हुए कहा कि भारत के प्रमुख शहरों में कुल डेटा सेंटर स्टॉक में 2026 में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. इस दौरान लगभग 500 मेगावाट की नई आपूर्ति जुड़ने की उम्मीद है. वर्ष 2025 में देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता 1,700 मेगावाट के स्तर पर पहुंच गई थी, जिसका मुख्य कारण 440 मेगावाट की रिकॉर्ड नई आपूर्ति का जुड़ना था.
2025 में कितना आया निवेश
रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले 2025 में इस संपत्ति वर्ग में 56.4 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता देखी गई, जिससे कुल कंयूलेटिव निवेश 126 अरब डॉलर तक पहुंच गया. सीबीआरई ने कहा कि इस साल इन प्रतिबद्धताओं के लगभग 45 फीसदी बढ़ने का अनुमान है, जो संभावित रूप से 180 अरब डॉलर को पार कर सकती हैं. सीबीआरई (भारत, दक्षिण-पूर्वी एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) के चेयरमैन और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अंशुमान मैगजीन ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब केवल क्षमता के बारे में नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर इसके कार्यान्वयन के बारे में है.
विदेशी निवेश की प्रमुख भूमिका
उन्होंने आगे कहा कि इस क्षेत्र की मजबूती और आकर्षक रिटर्न की संभावना इसे निवेशकों के लिए बेहतर बना रही है, जिसमें विदेशी पूंजी की मुख्य भूमिका है. इस रुचि को एक मजबूत नियामकीय ढांचे का समर्थन प्राप्त है, जो पारदर्शिता बढ़ाने और कर्ज तक पहुंच को सरल बनाने में सहायक है. वहीं दूसरी ओर भारत सरकार सेमीकॉन 2.0 पर भी फोकस किए हुए है. इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार की ओर से 1.25 लाख करोड़ रुपए का बजट तय किया है. वैसे अभी तक इस खबर की पुष्टी नहीं हुई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों हवाले कहा गया है कि इस बजट को फाइनेंस मिनिस्ट्री की ओर से मंजूरी मिल गई है.











