ईरान संघर्ष से फल-सब्जी और चावल निर्यात पर असर, भाड़ा बढ़ा और शिपमेंट में देरी

ईरान में जारी संघर्ष के बीच भारतीय फल और सब्जी निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। समुद्री और हवाई मार्ग प्रभावित होने से शिपमेंट में देरी हो रही है और भाड़ा दरों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। निर्यातकों का कहना है कि लागत बढ़ने और ट्रांजिट समय लंबा होने से माल खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।

पुणे के एक निर्यातक ने बताया कि यूरोप के लिए भेजी जाने वाली प्याज की खेप अब तय समय पर नहीं पहुंच पा रही है। पहले जो माल 20-25 दिन में गंतव्य तक पहुंच जाता था, अब उसे 40-45 दिन तक लग रहे हैं। ट्रांसशिपमेंट हब प्रभावित होने से देरी और बढ़ रही है। पश्चिम एशिया और यूरोप से मिले बड़े ऑर्डर अब जोखिम में हैं, जबकि खाड़ी देशों के लिए तय किए गए केले कम कीमत पर बेचने की नौबत आ सकती है।

ताजा सब्जियां भेजने वाले निर्यातकों का कहना है कि एयर फ्रेट या तो अत्यधिक महंगा हो गया है या उपलब्ध नहीं है। यूरोप के लिए हवाई किराए में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। पश्चिम एशिया के कई एयरपोर्ट बंद होने से कार्गो स्पेस सीमित हो गया है, जिससे एयरलाइंस की मोलभाव करने की स्थिति मजबूत हुई है। समुद्री भाड़े में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

चावल निर्यात भी इससे अछूता नहीं है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, सऊदी अरब के लिए 20 फीट कंटेनर भेजने की लागत महज 48 घंटे में बढ़कर 2,600 डॉलर तक पहुंच गई है। कई शिपिंग कंपनियों ने वॉर सरचार्ज लागू कर दिया है। अफ्रीका के लिए शिपमेंट जहाजों की कमी के कारण करीब 20 प्रतिशत महंगे हो गए हैं।

उद्योग संगठनों ने ईरान और यूएई के लिए जा रहे माल को जरूरत पड़ने पर वापस बुलाने या वैकल्पिक बंदरगाहों की ओर मोड़ने की सलाह दी है। अनुमान है कि लाखों टन चावल फिलहाल समुद्री मार्ग में है। निर्यातकों का कहना है कि कुछ यूरोपीय खरीदार बढ़ी कीमत चुकाने को तैयार हैं, लेकिन मौजूदा अनिश्चितता वैश्विक खुदरा बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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