ईरान के पास 440 किलो संवर्धित यूरेनियम, अमेरिका के लिए सीधा हमला बन रहा है जोखिम भरा

ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत उसके पास मौजूद करीब 440 किलो तक संवर्धित यूरेनियम मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, यह यूरेनियम लगभग 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया जा चुका है, जो उसे परमाणु हथियार बनाने की दहलीज पर खड़ा देश बना देता है।
आमतौर पर परमाणु बम बनाने के लिए 90 प्रतिशत संवर्धन की जरूरत होती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 60 से 90 प्रतिशत तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता। इसी वजह से ईरान को अब न्यूक्लियर थ्रेशहोल्ड स्टेट की श्रेणी में रखा जाने लगा है।
अमेरिका के लिए ईरान पर सीधा सैन्य हमला करना आसान नहीं है। यदि परमाणु ठिकानों पर बमबारी की जाती है, तो रेडिएशन फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। ईरान के कई परमाणु केंद्र जमीन के काफी नीचे बने हुए हैं, जिन पर हमला करने से यूरेनियम फैल सकता है और पूरे पश्चिम एशिया में प्रदूषण फैलने की आशंका बढ़ सकती है।
रेडिएशन का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव पड़ोसी देशों, आम नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि सैन्य कार्रवाई को बेहद जोखिम भरा माना जाता है।
अगर किसी हमले या राजनीतिक अस्थिरता के कारण ईरान की सरकार कमजोर होती है, तो परमाणु सामग्री की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे हालात में यह आशंका बढ़ जाती है कि संवेदनशील सामग्री गलत हाथों में चली जाए या आतंकी संगठनों तक पहुंच जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को केवल बमबारी से रोका नहीं जा सकता। इसके लिए कूटनीतिक बातचीत, अंतरराष्ट्रीय निगरानी और समझौतों की जरूरत होती है। इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई के बजाय प्रतिबंधों और संवाद का रास्ता अपनाते रहे हैं।
कुल मिलाकर, ईरान के पास मौजूद 440 किलो संवर्धित यूरेनियम उसे रणनीतिक बढ़त देता है और अमेरिका जैसे देशों के लिए सीधे हमले को बेहद जटिल और खतरनाक बना देता है।











