फैसलों की मेज पर आगे की कतार में होना जरूरी… Global South को लेकर जयशंकर का बड़ा मैसेज

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ देशों की एक हाई-लेवल मंत्रिस्तरीय बैठक में वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका और उनकी प्राथमिकताओं को लेकर भारत का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की front row में है, लेकिन decision-making में back row में है. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं पुराने दौर की शक्ति संरचनाओं को प्रतिबिंबित करती हैं और अब इनमें बदलाव की जरूरत है.
जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्षों, भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान, बढ़ती व्यापार बाधाओं, निवेश के बिखराव और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों से गुजर रही है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम और संस्थाएं भी दबाव में हैं.
ग्लोबल साउथ पर संघर्ष बढ़ने का सीधा असर
विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले एक साल में दुनिया में सक्रिय संघर्षों की संख्या बढ़ी है. इन संघर्षों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जोखिम बढ़ता है और इसका विशेष प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि जिस समय दुनिया को बहुपक्षवाद की ओर बढ़ना चाहिए था, उस समय इसके कमजोर होने की स्थिति दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि Global South को सप्लाई चेन, वित्त और कनेक्टिविटी में ऐसे choke points को स्वीकार या वैध नहीं मानना चाहिए, जो देशों की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा को राजनीतिक हथियार न बनाएं
जयशंकर ने ऊर्जा सुरक्षा को विकास के केंद्र में बताया. उन्होंने कहा कि ऊर्जा की उपलब्धता और उसकी कीमतों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नियंत्रित या प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने खाद्य सुरक्षा को साझा लक्ष्य बताते हुए अनाज और उर्वरकों की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों को तेजी से दूर करने की जरूरत बताई.
सिर्फ बाजार नहीं, उत्पादन क्षमता विकसित करे
विदेश मंत्री ने निष्पक्ष आर्थिक और व्यापारिक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां होनी चाहिए जो ग्लोबल साउथ की उत्पादन क्षमता को मजबूत करें, न कि इन देशों को केवल उपभोक्ता बनाकर रखें. उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण का अधिकार नकारा नहीं जाना चाहिए.
समुद्री रास्तों की सुरक्षा और सीफेयरर्स की सुरक्षा जरूरी
जयशंकर ने maritime commons को सुरक्षित रखने, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और seafarers एवं commercial shipping की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया. यह भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से संचालित होता है.
AI से नया डिजिटल विभाजन न हो पैदा
जयशंकर ने Artificial Intelligence (AI) के तेजी से हो रहे बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि AI के कारण नए वैश्विक विभाजन नहीं बनने चाहिए. भारत ने ग्लोबल साउथ के देशों के बीच स्वदेशी रूप से विकसित AI tools और frameworks साझा करने का सुझाव दिया. जयशंकर ने AI को human-centric बनाए रखने पर भी जोर दिया.
उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के बीच indigenous AI tools और frameworks साझा करने का सुझाव दिया. विदेश मंत्री ने कहा कि जिन मुद्दों का सीधे ग्लोबल साउथ के भविष्य पर असर पड़ता है, उन पर निर्णय लेने वाली संस्थाओं में Global South की प्रभावी भागीदारी होनी चाहिए.
ग्लोबल साउथ के मौजूदा मंचों का इस्तेमाल बढ़ाया जाए
जयशंकर ने सुझाव दिया कि ग्लोबल साउथ अपने मौजूदा बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल अपनी चिंताओं को प्रमुखता से उठाने के लिए करे, ताकि इन मुद्दों को वैश्विक एजेंडे में पीछे न धकेला जाए. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के बीच ज्यादा करीबी आर्थिक सहयोग जरूरी है, ताकि वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे पर पड़ने वाले संकटों के असर से बचाव किया जा सके.
Climate action के लिए भारत के नेतृत्व वाले मंचों पर जोर
जयशंकर ने कहा कि जलवायु कार्रवाई के लिए ग्लोबल साउथ को केवल ग्लोबल नॉर्थ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्होंने International Solar Alliance (ISA) और Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) जैसे मंचों को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई. विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और व्यापक बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार को ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं से निपटने के लिए आवश्यक बताया.
Global South की आवाज और भागीदारी बढ़े
जयशंकर के संबोधन का केंद्रीय संदेश यह रहा कि मौजूदा वैश्विक संकटों का सबसे अधिक असर झेलने वाले विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए. भारत ने इसके लिए आर्थिक सहयोग, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, AI सहयोग, जलवायु कार्रवाई और UN Reform को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा.











