सुपौल में 206 सरकारी प्रधानाध्यापकों के नौकरी पर मंडराया खतरा, बड़ी लापरवाही आई सामने

सुपौल : सुपौल में अब शिक्षा विभाग भी सरकारी शिक्षकों के खिलाफ कड़े रूख अपनाने लगे हैं. बार-बार स्कूल से शिक्षक गायब तो बच्चे की कम उपस्थिति की शिकायत मिलती ही रहती है. इतना ही ई-शिक्षा काेष पर शिक्षकों का हाजिरी नहीं बन पाता है. जिसको लेकर बार-बार स्पष्टीकरण भी पूछा जाता है. लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हाे पाता है.

इतना ही कर्तव्य में लापरवाही, उच्चाधिकारी के आदेश की भी सरकारी शिक्षकों के लिए कोई मायने नहीं रहता है. बार-बार आदेश व पत्र जारी होने के बावजूद अपने आदत से बाज नहीं आ रहे हैं, इसी कड़ी में मध्याह्न भोजन योजना में एक बार फिर विद्यालय प्रधानों की लापरवाही सामने आई है. जिले के 206 विद्यालयों ने फरवरी माह में विभिन्न तिथियों की रिपोर्ट ई-शिक्षा कोष पर समय से अपलोड नहीं किया है. ऐसे विद्यालयों पर कार्रवाई करने की रूप रेखा विभाग ने तैयार कर ली है. मध्याह्न भोजन योजना से आच्छादित वैसे विद्यालय जिसने फरवरी माह में ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर निर्धारित समय के बाद डाटा अपलोड नहीं किया वैसे विद्यालयों से इस माह की पोषाहार पंजी की सत्यापित छायाप्रति मांगी गई है.

इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मध्याह्न भोजन ने सभी प्रखंड साधनसेवियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. जारी पत्र के अनुसार विभागीय समीक्षा के दौरान यह पाया गया है कि फरवरी माह में जिले के 206 विद्यालयों के प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर मध्याह्न भोजन से संबंधित डाटा समय पर अपलोड नहीं किया गया. इससे उस दिन योजना से लाभान्वित बच्चों की गणना नहीं हो सकी है. इसको लेकर विभाग ने इन प्रधानों से स्पष्टीकरण की भी मांग भी की थी. इसके बावजूद प्रधानों ने जवाब देना मुनासिब नहीं समझा. अब विभाग ने ऐसे सभी विद्यालयों से संबंधित प्रखंड साधनसेवियों से इन विद्यालयों से पंजी लेकर गूगल शीट पर उस दिन की रिपोर्ट देने को कहा है.

विभाग के निर्देश के अनुसार मध्याह्न भोजन योजना से संबंधित डाटा निर्धारित समय के भीतर ई-शिक्षा कोष पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है. निर्धारित समय के बाद डाटा अपलोड करने वाले विद्यालयों को उस दिन की राशि (परिवर्तन मूल्य) का भुगतान नहीं किया जाना है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने बताया कि निदेशक, मध्याह्न भोजन योजना के निर्देश के आलोक में जिले के ऐसे सभी विद्यालयों की सूची तैयार की गई है, जिनके द्वारा पोर्टल पर डाटा अपलोड करने में अनियमितता बरती जा रही है. इन विद्यालयों से फरवरी की पोषाहार पंजी की सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही सभी प्रखंड साधनसेवियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित विद्यालयों से पोषाहार पंजी की छायाप्रति प्राप्त कर उसे गूगल शीट में अंकित करें और निर्धारित तिथि तक जिला कार्यालय में उपलब्ध कराएं. इसके आधार पर विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी.

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी की जा रही है, ताकि लाभान्वित बच्चों की सही संख्या और भोजन वितरण की स्थिति का सटीक आकलन हो सके. समय पर डाटा अपलोड नहीं होने से योजना के संचालन और भुगतान प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है.

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित विद्यालयों द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर पोषाहार पंजी की सत्यापित प्रति उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

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