सुपौल में युवती का वीडियो वायरल करना पड़ा महंगा, कोर्ट ने अभियुक्त को सुनाई…

सुपौल: करजाईन थाना कांड संख्या 132/24, पोक्सो वाद संख्या 105/24 से जुड़े एक मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पोक्सो संतोष कुमार दुबे की कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है.
कोर्ट ने पीड़िता से संबंधित वीडियो बनाकर वायरल करने के आरोप में अभियुक्त गणेश मेहता, थाना करजाईन को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई. न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 126 (2) के तहत 1 माह का साधारण कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना, धारा 127(2) के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना, धारा 115(2) के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना, धारा 74 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास एवं 20,000 रुपये जुर्माना, धारा 75 के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10,000 रुपये जुर्माना, धारा 76 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25,000 रुपये जुर्माना, धारा 333 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25,000 रुपये जुर्माना, धारा 351(2) के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 352 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. इसके अतिरिक्त पोक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25,000 रुपये जुर्माना, धारा 10 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 12 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10,000 रुपये जुर्माना दिया गया. बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 10 के अंतर्गत अभियुक्त को 2 वर्ष का कठोर कारावास एवं 50,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई.
वहीं एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(आर)(एस)(डब्लू) के तहत 3-3 वर्ष का कठोर कारावास एवं प्रत्येक धारा में 20-20 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने अपना पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार मेहता ने दलीलें प्रस्तुत की. कुल 10 अभियुक्तों वाले इस मामले में इससे पूर्व 15 जनवरी 2026 को 8 आरोपियों को न्यायालय द्वारा दोषी करार दिया जा चुका था. उस दिन अभियुक्त गणेश मेहता निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ था, जिसके कारण उसके विरुद्ध अग्रिम कार्रवाई जारी रखी गई थी. इस मामले में कुल 13 गवाहों ने न्यायालय के समक्ष गवाही दी, जिनके बयान एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी पाया.











