मध्यस्थता की कोशिशें कमजोर, पश्चिम एशिया में जंग और भड़कने के संकेत

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है। हालात ऐसे संकेत दे रहे हैं कि जंग थमने के बजाय और तेज हो सकती है, जबकि पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी असरदार होती नहीं दिख रहीं।

संघर्ष के बीच सबसे बड़ा संकेत जमीनी सैन्य कार्रवाई की तैयारी को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित ग्राउंड ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार कर ली है। रणनीतिक तौर पर खार्ग द्वीप को अहम लक्ष्य माना जा रहा है, जहां से ईरान का बड़ा तेल निर्यात होता है। अमेरिकी सेना की तैनाती और तैयारी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का संकेत दे रही है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है। कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र में हुए हमलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसके जवाब में अमेरिका और इजराइल भी ईरान के ठिकानों पर हमले तेज कर रहे हैं, जिससे टकराव और गहरा गया है।

कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति सकारात्मक नहीं दिख रही। बातचीत की संभावनाएं लगातार कमजोर हो रही हैं। ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की वार्ता से इनकार कर दिया है, जबकि प्रस्तावित कूटनीतिक यात्राएं भी टल रही हैं। इससे यह साफ है कि फिलहाल समाधान का रास्ता बंद नजर आ रहा है।

इस बीच, युद्ध से बाहर निकलना अमेरिका के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। ईरान ने युद्धविराम की शर्तों को खारिज कर दिया है, जिससे संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है।

हालात को और जटिल बनाते हुए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की एंट्री भी हो चुकी है। यमन से इजराइल पर मिसाइल हमले और समुद्री मार्गों पर खतरे ने इस संघर्ष का दायरा और बढ़ा दिया है।

इन सभी घटनाक्रमों से साफ है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय बढ़ रहा है और आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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