Naxali Surrender News- लाल आतंक के सुप्रीम कमांडर ने टेके घुटने.. देवजी ने किया सरेंडर,
करीब 60 वर्षीय देवजी, जिसे माओवादी गलियारों में 'देवअन्ना', 'चेतन', 'संजीव' और 'सुदर्शन' जैसे कई नामों से जाना जाता था, संगठन का सबसे शक्तिशाली और खतरनाक चेहरा था। मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर जिले का रहने वाला देवजी अपने छात्र जीवन के दौरान ही कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मुड़ गया था।

Naxali Surrender News/भारत में नक्सलवाद के खिलाफ दशकों से चली आ रही जंग में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है।
माओवादी संगठन के सर्वोच्च नेता और महासचिव देवजी उर्फ थिप्पिरी तिरुपति ने अपने 16 खूंखार साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। इस सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियां 31 मार्च 2026 की निर्धारित समय सीमा से पहले नक्सलवाद के ताबूत में आखिरी कील मान रही हैं। झीरम घाटी जैसे भीषण नरसंहारों की साजिश रचने वाले इस मास्टरमाइंड का मुख्यधारा में लौटना यह साफ संकेत देता है कि अब लाल आतंक की जड़ें पूरी तरह से खोखली हो चुकी हैं और संगठन पूरी तरह नेतृत्व विहीन हो गया है।
करीब 60 वर्षीय देवजी, जिसे माओवादी गलियारों में ‘देवअन्ना’, ‘चेतन’, ‘संजीव’ और ‘सुदर्शन’ जैसे कई नामों से जाना जाता था, संगठन का सबसे शक्तिशाली और खतरनाक चेहरा था। मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर जिले का रहने वाला देवजी अपने छात्र जीवन के दौरान ही कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मुड़ गया था।
अपनी तेज रणनीतिक सूझबूझ और संगठनात्मक कौशल के कारण वह जल्द ही माओवादियों की मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग का प्रमुख और फिर पोलित ब्यूरो का सदस्य बना। मई 2025 में शीर्ष नेता बसवराजु की मौत के बाद, सितंबर 2025 में उसे सीपीआई (माओवादी) का महासचिव नियुक्त किया गया था। विभिन्न राज्यों में उस पर 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए उसके खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।
इस ऐतिहासिक सरेंडर के पीछे सुरक्षा बलों का साझा अभियान “ऑपरेशन कगार” सबसे बड़ी वजह बताया जा रहा है। कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए इस गहन और निरंतर सैन्य ऑपरेशन के कारण नक्सली नेतृत्व चारों तरफ से घिर गया था। रसद की कमी, संचार तंत्र का टूटना और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के चलते संगठन का ढांचा बिखरने लगा।
अंततः कोई और रास्ता न देख देवजी और इनामी माओवादी ‘संग्राम’ जैसे शीर्ष नेताओं ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का रास्ता चुना। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि गोवा, केरल और बंगाल तक फैले माओवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने में यह सफलता मील का पत्थर साबित होगी।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस बड़ी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नक्सलियों का एक बहुत बड़ा धड़ा अब ढह चुका है और बचे हुए उग्रवादी अब प्रभावी नहीं रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सशस्त्र नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और सुरक्षा बलों का अभियान पूरी तीव्रता के साथ जारी है। सरकार ने शेष बचे उग्रवादियों से भी आह्वान किया है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।











