टीईटी से छूट नहीं: हजारों शिक्षकों की कुर्सी खतरे में, संघ ने फूंका आंदोलन का बिगुल

​सिद्धार्थनगर: केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता में ढील देने से स्पष्ट इनकार के बाद उत्तर प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटक गई है. इस फैसले ने बेसिक शिक्षा परिषद के तहत कार्यरत उन शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है, जिनकी नौकरी अब संकट में नजर आ रही है. केंद्र के इस कड़े रुख के खिलाफ ‘उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ’ ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है.

​क्या है पूरा विवाद?

​यह मामला मुख्य रूप से वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए उन शिक्षकों से जुड़ा है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपनी सेवा जारी रखने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया था. हालांकि, पूर्व में कई केंद्रीय मंत्रियों ने इस मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और छूट दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन हाल ही में लोकसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के दो टूक जवाब ने शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

​आंदोलन की रूपरेखा: ट्विटर से दिल्ली तक गूंज

सोमवार को खुनियांव बीआरसी सभागार में आयोजित संघर्ष मोर्चा की बैठक में प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने आंदोलन के चरणों की घोषणा की- ​

22 फरवरी: दोपहर 2 से 4 बजे तक देशव्यापी ट्विटर अभियान के जरिए विरोध प्रदर्शन.
23-25 फरवरी: शिक्षक स्कूलों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे.
26 फरवरी: जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा.
​मार्च (तीसरा सप्ताह): दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के शिक्षकों का विशाल महाजुटाव और धरना.

​”वर्तमान समय में सोशल मीडिया अपनी आवाज बुलंद करने का सबसे सशक्त माध्यम है. शिक्षकों को अपने अस्तित्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिए एकजुट होना ही होगा.”
— राधेरमण त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ

​बैठक में योगेंद्र प्रसाद पांडेय सहित राज किशोर शर्मा, विजय बहादुर अंबेडकर, विद्या भूषण यादव, जगदीश वर्मा, अताउल्लाह खां, आशुतोष पाण्डेय, उमेश चन्द्र, बुद्धिराम वरुण, नंदलाल, विकास ओझा, विनीता, राकेश प्रताप, लाल बहादुर, ज्योतिमा, राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय, मेहंदी हसन, मोहम्मद जैद, विजय कुमार आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे. संघ का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा.

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