रंगपंचमी पर महाकाल मंदिर में विशेष पूजन, केसर जल से होगी होली, रंग-गुलाल लाने पर रहेगा प्रतिबंध

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रंगपंचमी का पर्व विशेष धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जाएगा। तड़के होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल को केसरिया रंग अर्पित कर प्रतीकात्मक रूप से होली खेली जाएगी। इस दौरान भगवान को एक लोटा केसर जल चढ़ाया जाएगा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार रंगपंचमी के दिन सुबह भस्म आरती के समय पुजारी भगवान महाकाल को केसरिया रंग अर्पित कर पर्व मनाएंगे। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसे राजा के आंगन में मनाई जाने वाली रंग-रंगीली होली के रूप में देखा जाता है।
शाम को होने वाली संध्या आरती में भी भगवान को एक लोटा केसरिया रंग और लगभग 500 ग्राम गुलाल अर्पित किया जाएगा। हालांकि मंदिर परिसर में पुजारी, पुरोहित, उनके सेवक और श्रद्धालुओं द्वारा होली खेलने की अनुमति नहीं रहेगी।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर परिसर में रंग, गुलाल और प्रेशर गन जैसे उपकरण लेकर आने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सभी प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा कर्मी जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश देंगे। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे रंग-गुलाल या रंग उड़ाने वाले उपकरण लेकर मंदिर न आएं।
रंगपंचमी के अवसर पर शाम सात बजे परंपरानुसार श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह भी निकाला जाएगा। मंदिर के पुजारी और पुरोहित परिवार की ओर से आयोजित इस समारोह की शुरुआत सभा मंडप में भगवान वीरभद्र की पूजा और ध्वज पूजन के बाद होगी।
ध्वज चल समारोह में इस बार 27 दल शामिल होंगे। इसमें नासिक की ढोल पार्टी और भगवान महाकाल के सेहरा दर्शन की झांकी प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार वीरभद्र भगवान महाकाल के प्रमुख गण माने जाते हैं। प्रतिदिन तड़के चार बजे भस्म आरती के लिए मंदिर के पट खोलने से पहले वीरभद्र से आज्ञा लेने की परंपरा निभाई जाती है। इसी कारण ध्वज चल समारोह से पहले भी वीरभद्र की पूजा की जाती है।











