Operation Urja Suraksha: तेल की एक-एक बूंद सुरक्षित, होर्मुज में भारतीय नौसेना की मिशन मोड तैनाती

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा (Operation Urja Suraksha) शुरू कर दिया है. इस मिशन के तहत नौसेना ने पांच से अधिक फ्रंटलाइन युद्धपोतों को तैनात किया है. ताकि भारत-बाउंड कार्गो जहाजों, खासकर एलपीजी, एलएनजी और क्रूड ऑयल ले जाने वाले टैंकरों की सुरक्षित निकासी और यात्रा सुनिश्चित की जा सके.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट है, जिससे वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है. हालिया संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और कई भारत-बाउंड जहाज अटके हुए थे. रक्षा सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में करीब 20-22 भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें उच्च प्राथमिकता वाले ऊर्जा टैंकर शामिल हैं.

मिशन की प्रमुख उपलब्धियां

ऑपरेशन शुरू होने के कुछ ही दिनों में नौसेना को महत्वपूर्ण सफलता मिली है. हाल ही में एलपीजी कैरियर पाइन गैस और जग वसंत ने नौसेना के संरक्षण में होर्मुज को सफलतापूर्वक पार किया. इन दोनों जहाजों में कुल लगभग 92,000 टन एलपीजी है, जो अगले कुछ दिनों में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाला है. इसके पहले शिवालिक, नंदा देवी जैसे अन्य एलपीजी कैरियर और क्रूड ऑयल टैंकर जग लाडकी को भी सुरक्षित निकाला गया था.

क्यों जरूरी है यह ऑपरेशन?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है. होर्मुज में किसी भी तरह की परेशानी से देश में तेल-गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर अर्थव्यवस्था और आम जनता दोनों पर पड़ता. इस ऑपरेशन के जरिए सरकार और नौसेना की तुरंत कार्रवाई से ऊर्जा सुरक्षा बनी रहेगी और घरेलू बाजार में एलपीजी जैसी जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होगी. यह मिशन भारत की समुद्री क्षमता और कूटनीतिक पहल का सबूत है. ईरान से भी भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग की अनुमति ली गई है.

आगे क्या?

नौसेना के सूत्रों के मुताबिक, बाकी अटके हुए जहाजों को भी चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित निकाला जाएगा. ऑपरेशन की सफलता से भारत की ऊर्जा आपूर्ति मजबूत बनी रहेगी, भले ही क्षेत्रीय तनाव कितना भी बढ़ जाए. यह मिशन न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि भारतीय नौसेना की वैश्विक स्तर पर बढ़ती भूमिका को भी दिखाता है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close