पाकिस्तान-जर्मनी आउट, अमेरिका को भी झटका… UNSC के भीतर हुए ये 5 बड़े बदलाव

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के लिए पांच नए अस्थायी सदस्य देशों का चुनाव किया. ऑस्ट्रिया, किर्गिस्तान, पुर्तगाल, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और जिम्बाब्वे को 1 जनवरी 2027 से शुरू होने वाले दो साल के कार्यकाल के लिए चुना गया है. इस चुनाव से वैश्विक कूटनीति में कई बड़े उलटफेर हुए हैं. आइए जानते हैं पांच सबसे अहम बदलाव…

1. पाकिस्तान की विदाई

पाकिस्तान को 2025 से 2026 के लिए UNSC में अस्थायी सदस्य के तौर पर चुना गया था. उसने जुलाई 2025 में रोटेशनल नीति के तहत एक महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भी की थी. पाकिस्तान को UNSC की 1988 तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष और आतंकवाद-रोधी समिति का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था. लेकिन 31 दिसंबर 2026 को उसका कार्यकाल खत्म होने वाला है. अब एशिया-प्रशांत समूह से उसकी जगह किर्गिस्तान ने ले ली है

2. पहली बार किर्गिस्तान की एंट्री

एशिया-प्रशांत समूह में बड़ा बदलाव हुआ. यहां फिलीपींस और किर्गिस्तान के बीच कड़ा मुकाबला था. चार दौर की वोटिंग के बाद किर्गिस्तान ने जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया. उसे 142 वोट मिले, जबकि फिलीपींस को 49 वोट मिले. इसके साथ ही किर्गिस्तान पहली बार UNSC का सदस्य बना है.

3. जर्मनी की ऐतिहासिक हार

इस चुनाव की सबसे बड़ी चौंकाने वाली खबर जर्मनी को लेकर रही. पश्चिमी यूरोप और अन्य देशों के समूह की दो सीटों के लिए जर्मनी, ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल के बीच मुकाबला था. जर्मनी ने सीट जीतने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन उसे सिर्फ 104 वोट मिले. वहीं पुर्तगाल को 134 और ऑस्ट्रिया को 131 वोट मिले. इसके साथ ही जर्मनी चुनाव हार गया और पहली बार सुरक्षा परिषद में जगह नहीं बना सका. इससे पहले जर्मनी 6 बार UNSC की सीट जीत चुका है.

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इसे नाकामी बताया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जर्मनी के इजराइल और अमेरिका-ईरान हमलों पर नरम रुख ने कई देशों को उससे दूर किया. दिलचस्प बात यह रही कि इस मतदान की अध्यक्षता जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री अन्नालेना बेयरबॉक ने की. वह फिलहाल (UNGA) की अध्यक्ष हैं. जर्मनी लंबे समय से UNSC की स्थायी सदस्यता मांग रहा है. उसका कहना है कि UNSC का विस्तार होना चाहिए. जर्मनी अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों के लिए भी अधिक स्थायी और अस्थायी सीटों की वकालत करता रहा है.

4. अमेरिका को झटका

UNSC में फिलीपींस की हार से अमेरिका को एक बड़ा रणनीतिक झटका लगा है. वॉशिंगटन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए फिलीपींस को एक अहम भागीदार के रूप में आगे बढ़ा रहा था. इस सीट के लिए फिलीपींस का मुकाबला किर्गिस्तान से था, जो शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सदस्य है. इस हार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका के क्षेत्रीय प्रभाव और उसकी लामबंदी पर सवाल खड़े किए हैं.

5. नई परिषद की तस्वीर

अफ्रीका समूह की सीट पर जिम्बाब्वे निर्विरोध चुना गया है, जो सोमालिया की जगह लेगा. वहीं लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की सीट पर त्रिनिदाद एंड टोबैगो निर्विरोध विजेता बना, जो पनामा की जगह लेगा. इसके अलावा पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया अब डेनमार्क और ग्रीस की जगह लेंगे. पांचों नए सदस्य सदस्य बहरीन, कोलंबिया, कांगो, लातविया और लाइबेरिया के साथ मिलकर परिषद में काम करेंगे.

इससे पहले मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर्रहमान को 193 मेंबर वाली UNGA के 81वें सत्र का अध्यक्ष चुना था. उनका कार्यकाल सितंबर 2026 से शुरू होगा. UN के 50 से ज्यादा देश ऐसे हैं, जो कभी भी UNSC के मेंबर नहीं रहे हैं. परिषद इस समय यूक्रेन और मिडिल ईस्ट जैसे कठिन मुद्दों का सामना कर रही है, जहां महाशक्तियों के बीच बढ़ते कॉम्पिटिशन से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है.

UNSC क्यों अहम है?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुल 15 देशों की संस्था है. यह संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली इकाई मानी जाती है. यही संस्था दुनिया में शांति और सुरक्षा से जुड़े फैसले लेती है. इसके पास किसी देश पर प्रतिबंध लगाने और सैन्य कार्रवाई की मंजूरी देने का अधिकार भी है. सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, रूस, चीन फ्रांस और यूके. इन देशों के पास वीटो पावर है. बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं, जिनका चुनाव 2 साल के कार्यकाल के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से किया जाता है. ये क्षेत्र अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप के आधार पर बांटे जाते हैं.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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