ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा पाकिस्तान, PDP से लेकर NC तक जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने दी ऐसी प्रतिक्रिया

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर PDP नेता आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने कहा कि ये एक स्वागत योग्य कदम है. कुछ देशों ने इस संकट को कम करने की पहल की है. उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई आलोचना नहीं होनी चाहिए. हर देश को अपनी भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें कोई समाधान खोजने की कोशिश करनी चाहिए. दरअसल, अमेरिकी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी समूहों को पनाह दे रहा है, इस पर सैयद मुंतजिर ने जवाब दिया.
इसी युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता JKNC के MLA तनवीर सादिक ने कहा कि मैं अपने देश के बारे में ज्यादा बात करूंगा. ईरान और भारत के बीच बहुत मजबूत और पुराना रिश्ता है. अगर कोई इस मामले में सही तरीके से मध्यस्थता कर सकता है, तो वह हमारा देश ही है.
अमेरिका की उस रिपोर्ट पर, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी गुटों को पनाह दे रहा है, वह कहते हैं, तो फिर उन्हें मध्यस्थ के तौर पर क्यों स्वीकार किया जा रहा है? इस देश ने बहुत आतंकवाद झेला है और अब इसे खत्म करने का समय आ गया है.
‘भारत को किसी से सलाह लेने की जरूरत नहीं’
इसी रिपोर्ट पर कांग्रेस विधायक निजाम उद्दीन भट्ट ने कहा कि ये सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं. भारत की सुरक्षा एजेंसियां इन मुद्दों को संभालती हैं. उन्हें किसी की सलाह की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि हमें अपनी सुरक्षा एजेंसियों पर भरोसा है. पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर वे कहते हैं कि ये बड़े मुद्दे हैं. हम चाहते हैं कि युद्ध रुक जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मध्यस्थता कौन कर रहा है. बेगुनाह लोगों की जान जा रही है और संपत्ति का भी नुकसान हो रहा है.
रिपोर्ट में क्या?
पाकिस्तान को एक बार फिर आतंकवादी समूहों को लंबे समय से दिए जा रहे समर्थन देने वाला बताया गया है. 25 मार्च की अमेरिकी कांग्रेसी रिसर्च रिपोर्ट में इसके बारे में जानकारी दी गई. ये रिपोर्ट पाकिस्तान की एक कड़वी सच्चाई सामने रखती है कि वो कई हथियारबंद और आतंकवादी संगठनों का अड्डा बन चुका है. इनमें से कुछ तो 1980 के दशक से ही सक्रिय हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ये समूह अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं. वैश्विक स्तर पर सक्रिय, अफगानिस्तान-केंद्रित, भारत-केंद्रित, घरेलू या सांप्रदायिक हैं. इनमें से बारह संगठनों को अमेरिकी कानून के तहत ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ घोषित किया गया है. इनमें से ज्यादातर संगठन इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा को मानते हैं.











