UPSC के शताब्दी समारोह में बोले PM Modi “ऐसे युवाओं को आगे लाना होगा जो Public Office से नहीं, Public Service से आकर्षित हों”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज UPSC के शताब्दी समारोह में शामिल हुए, उन्होंने कहा आज का ये दिन, UPSC के 100 वर्षों के उत्सव के साथ ही विरासत का भी उत्सव है। ये उत्सव उस आकांक्षा का है, जिसे हर वर्ष लाखों-लाख युवा जीते हैं। ये उत्सव उस विश्वास का है, जो हर भारतवासी का इस संस्था पर है। 100 वर्ष की इस यात्रा में पीढियां बदलीं, सरकारें बदलीं, technology बदली, सिलेबस बदले। लेकिन, UPSC पर भरोसा आज भी उतना ही अटूट है। ये आप सभी की बहुत बड़ी पूंजी है। 100 वर्षों की इस यात्रा पर अभी यहां एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया। मैं 100 वर्ष की इस यात्रा से जुड़े सभी महानुभावों का वंदन करता हूं, आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा अभी जब मैं यहां गैलरी देख रहा था, तो 1920 में सुभाषचंद्र बोस भी इसी प्रकिया से गुजरे थे, उसकी सारी जानकारी भी वहां है। मेरा इस बात पर ध्यान गया कि उस समय अंग्रेजों की हुकूमत थी, लेकिन संस्कृत का पेपर हुआ करता था और सुभाष बाबू ने संस्कृत में पेपर लिखा है। आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं सरदार वल्लभ भाई पटेल को भी नमन करूंगा। आजादी के बाद उनके सामने केवल एक देश को आजाद रखने की चुनौती नहीं थी, उनके सामने एक राष्ट्र को चलाने की चुनौती भी थी। राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए जिस skill frame की जरूरत थी, वो सरदार वल्लभ भाई पटेल ने दिया। उन्होंने इस संस्था को आजाद भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाया, इसे सशक्त किया।

राष्ट्र प्रथम, नागरिक प्रथम, यही दो कसौटियां चयन का आधार 

मोदी ने कहा आज आप जिन युवाओं की भर्ती कर रहे हैं, वो विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे और वही विकसित भारत के सबसे बड़े लाभार्थी भी होने वाले हैं। उन्होंने कहा हमें दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है। एक – राष्ट्र प्रथम दूसरी –  नागरिक प्रथम, यही दो कसौटियां हैं, जिन पर हर सिलेक्शन को कसा जाना है। हमें ऐसे युवाओं को  Public Services में लाना होगा, जो Public Office से नहीं, Public Service से आकर्षित हों। इसलिए जरूरी है कि भर्ती परीक्षा, सिर्फ यह न परखे कि अभ्यर्थी कितना जानता है। बल्कि वो यह भी देखे कि वह युवा Civil Services में आना क्यों चाहता है।

आज सरकार माई बाप नहीं , हमारा मंत्र है… नागरिक देवो भव:

प्रधानमंत्री ने कहा हमने अतीत का वो दौर देखा है, जब माना जाता था कि सरकार ही माई-बाप है लेकिन आज ये दौर है, जिसमें हमारा मंत्र है… नागरिक देवो भव:। यानी देश का नागरिक हमारे लिए किसी देव से कम नहीं है। हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है। आज 21वीं सदी का भारत, एक नई कार्य-संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। इसका मूल सिद्धांत है – Pro-People, Pro-Active, Good Governance., मोदी ने कहा एक विषय UPSC और राज्यों के चयन आयोगों की capacity building का भी है। ये काम भी निरंतर होते रहना चाहिए। मिशन कर्मयोगी के तहत जो iGOT प्लेटफॉर्म बनाया गया है, उसका उपयोग हमारी इन अंदरूनी व्यवस्थाओं के लिए भी, हमारे साथ काम करने वाली टीम की क्षमता के लिए भी किया जा सकता है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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