हनुमान जी को लेकर बयान पर एमपी में सियासी घमासान, उमंग सिंघार और बीजेपी आमने-सामने

मध्य प्रदेश की राजनीति में हनुमान जी को लेकर एक बार फिर नई बहस शुरू हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और भारतीय जनता पार्टी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
एक कार्यक्रम के दौरान उमंग सिंघार ने कहा कि भगवान राम की वानर सेना वास्तव में आदिवासी समाज से जुड़ी थी, लेकिन कथाकारों ने उन्हें वानर के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज की अलग पहचान, संस्कृति और परंपराएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जाता रहा है।
उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज सूरज, गाय और फसलों की पूजा करता है और अपनी परंपराओं पर गर्व करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी कमजोर नहीं हैं, बल्कि उनके पास आत्मसम्मान, साहस और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी संस्कृति से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
इस बयान पर बीजेपी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि हनुमान जी सभी के आराध्य हैं और वे पूरे समाज के भगवान हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई उन्हें आदिवासी मानता है तो इस पर आपत्ति नहीं है, लेकिन हनुमान जी की भक्ति और उनकी महिमा सबसे ऊपर है।
रामेश्वर शर्मा ने यह भी कहा कि हनुमान जी रामभक्त, महाबली और धर्म की स्थापना के प्रतीक हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि उन्हें आदिवासी माना जाता है, तो उनके सम्मान में मंदिर बनवाने और पूजा-अर्चना करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब उमंग सिंघार ने इस तरह का बयान दिया हो। इससे पहले भी वे हनुमान जी को आदिवासी समाज से जोड़ते हुए बयान दे चुके हैं, जिस पर राजनीतिक विवाद हुआ था।
फिलहाल इस बयान को लेकर प्रदेश में राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।











