सैफई : भगवान् श्रीकृष्ण प्रतिमा फिर बनी सियासी प्रतीक, अखिलेश यादव की पोस्ट से गरमाए राजनीतिक गलियारे

इटावा:- जिले के सैफई में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है.समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने बुधवार देर शाम इस प्रतिमा की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए एक ऐसा संदेश लिखा, जिसे राजनीतिक हलकों में सत्ता पर परोक्ष निशाने के रूप में देखा जा रहा है.पोस्ट सामने आते ही समर्थकों और विपक्षी दलों के बीच इसकी अलग-अलग व्याख्याएं शुरू हो गईं.
हालांकि अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव ने किसी नेता या राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके संदेश को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.कई लोग इसे मौजूदा राजनीतिक हालात पर टिप्पणी के तौर पर देख रहे हैं, जबकि उनके समर्थक इसे एक प्रतीकात्मक संदेश बता रहे हैं.सोशल मीडिया पर भी इस पोस्ट को लेकर बहस का दौर शुरू हो गया है.
सैफई में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की यह प्रतिमा अपने अनोखे स्वरूप और विशाल आकार के कारण पहले से ही आकर्षण का केंद्र रही है। करीब 51 फुट ऊंची इस प्रतिमा को कांस्य और तांबे से तैयार किया गया है और इसका वजन लगभग 60 टन बताया जाता है.प्रतिमा में भगवान श्रीकृष्ण को महाभारत के युद्ध प्रसंग में रथ का पहिया उठाए आक्रामक मुद्रा में दिखाया गया है, जो सुदर्शन चक्र की प्रतीकात्मक शैली को दर्शाता है. इसी वजह से यह प्रतिमा अक्सर सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि राजनीतिक चर्चाओं में भी सामने आती रहती है.
2016 के आसपास शुरू हुआ था निर्माण
इस प्रतिमा का निर्माण कार्य लगभग 2016 के आसपास शुरू हुआ था.इसे सैफई महोत्सव समिति की ओर से बनवाया गया था। आधुनिक तकनीक और थ्री-डी डिजाइन की मदद से तैयार की गई इस प्रतिमा में विशेष धातुओं का इस्तेमाल किया गया है.जानकारी के मुताबिक इसके कुछ हिस्सों के लिए विदेश से भी सामग्री मंगाई गई थी.निर्माण के बाद से यह प्रतिमा सैफई आने वाले लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण बन गई है और अक्सर इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं.
पहले भी दे चुके हैं ऐसे संकेत
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव
ने सैफई की इस प्रतिमा का जिक्र कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की हो। इससे पहले भी वह कई बार इसी प्रतिमा की फोटो और वीडियो साझा कर अपने विरोधियों पर परोक्ष टिप्पणी कर चुके हैं.
ताजा पोस्ट के बाद एक बार फिर यह प्रतिमा सियासी बहस का विषय बन गई है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया हो, लेकिन इसके संकेत मौजूदा सत्ता की ओर समझे जा रहे हैं.फिलहाल सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पोस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है.











