₹6337 करोड़ के नोटिस पर SBI की सफाई, जानें क्या कहा बैंक ने

शुक्रवार, 20 मार्च को शेयर बाजार (एक्सचेंज) को दी गई बैंक की एक आधिकारिक सूचना ने वित्तीय जगत में काफी हलचल पैदा कर दी है. दरअसल, आयकर विभाग ने SBI को पूरे 6,338 करोड़ रुपये का भारी-भरकम टैक्स डिमांड नोटिस थमा दिया है. दरअसल, यह पूरा मामला वित्त वर्ष 2023-24 (असेसमेंट ईयर) के टैक्स आकलन से गहराई से जुड़ा हुआ है.
बैंक की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, इनकम टैक्स विभाग ने हाल ही में बैंक के बही-खातों की कड़ी जांच-पड़ताल (स्क्रूटनी) की थी. इस गहन समीक्षा के दौरान टैक्स अधिकारियों ने बैंक द्वारा दिखाए गए कुछ खर्चों या दावों को नामंजूर कर दिया, जिसे वित्तीय भाषा में ‘डिसअलाउंस’ (disallowance) कहा जाता है.
आयकर विभाग द्वारा खारिज किए गए इन्हीं दावों और उन पर लगाए गए भारी ब्याज को मिलाकर यह 6,338 करोड़ रुपये की विशाल देनदारी बनी है. एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, यह आदेश 19 मार्च 2026 को आयकर अधिनियम की धारा 143(3), 144C(3) और 144B के सख्त प्रावधानों के तहत जारी किया गया है.
क्या यह कोई नई गलती है या पुरानी उलझन?
वहीं बैंक प्रबंधन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि टैक्स के नियमों और दावों को लेकर ऐसे ही कई मामले पिछले कुछ वर्षों से कानूनी लड़ाई के दौर से गुजर रहे हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि आयकर विभाग का यह ताजा नोटिस किसी नई या अलग-थलग गलती का नतीजा नहीं है. बल्कि, यह विभाग और बैंक के बीच चल रहे उन पुराने टैक्स विवादों की एक लंबी कड़ी का ही हिस्सा है.
चूंकि 6,338 करोड़ रुपये की यह रकम बहुत बड़ी है और यह बैंक के तय नियमों (मटेरियलिटी थ्रेशोल्ड) के दायरे में आती है, इसलिए कॉरपोरेट पारदर्शिता का पालन करते हुए बैंक ने बिना देरी किए इसकी जानकारी अपने शेयरधारकों और आम जनता के साथ साझा की है.
आम ग्राहकों पर क्या होगा असर ?
SBI ने स्पष्ट किया है कि इस भारी-भरकम मांग का उसकी व्यावसायिक गतिविधियों या दैनिक संचालन (ऑपरेशंस) पर रत्ती भर भी प्रभाव नहीं पड़ेगा. बैंक का कामकाज पहले की तरह ही सुचारू रूप से चलता रहेगा.
साथ ही, बैंक इस फैसले को चुपचाप स्वीकार करने वाला नहीं है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भरोसा दिलाया है कि वह इस टैक्स डिमांड के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाएगा. इसमें तय समय सीमा के भीतर संबंधित अपीलीय अधिकारियों (appellate authorities) के समक्ष इस आदेश को चुनौती देना और आधिकारिक तौर पर अपील दायर करना शामिल है.











