SIR पर चुनाव आयुक्तों के राय की अनदेखी… आरोपों पर EC की सफाई- आयोग में फैसले मिलकर लेते हैं

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जून 2025 में बिहार में शुरू किए गए विशेष गहन संशोधन (SIR) लगातार सुर्खियों बना हुआ है.
SIR वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा करने की एक सामान्य प्रक्रिया है. 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं. इससे निर्वाचन आयोग इस बात को लेकर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है कि वोट का अधिकार किसे मिलेगा और किसे नहीं, यह तय करने में उसकी क्या भूमिका है.

एक रिपोर्ट से पता चला है कि इसी दौरान कई बार तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग के अंदर ही इन मुद्दों पर सवाल खड़े किए गए थे.
ये सवाल तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने उठाए थे, जिनके नाम सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं.

वहीं अब चुनाव आयोग की तरफ इस मामले में सफाई दी गई है. चुनाव आयोग का कहना है कि सभी फैसले, जिनमें SIR भी शामिल है, सर्वसम्मति से और दोनों चुनाव आयुक्तों एवं मुख्य चुनाव आयुक्त की मंज़ूरी से लिए गए हैं.

दरअसल भारत के तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद और मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा दोनों चुनाव आयुक्तों को जानबूझकर प्रक्रिया से दूर रखने की बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और कदमों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई है.

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jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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