बिना युद्ध और खून-खराबे के आजाद हुआ स्लोवाकिया, आज यूरोप की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों स्लोवाकिया के दौरे पर हैं। मध्य यूरोप का यह छोटा देश अपने शांतिपूर्ण इतिहास, मजबूत औद्योगिक ढांचे और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। कभी कई साम्राज्यों के अधीन रहने वाला स्लोवाकिया आज यूरोप के समृद्ध देशों में गिना जाता है और भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है।

शांतिपूर्ण आंदोलन से मिली स्वतंत्रता

स्लोवाकिया का इतिहास कई विदेशी शक्तियों के शासन से जुड़ा रहा है। यह कभी ग्रेट मोरावियन साम्राज्य, हंगरी, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य और बाद में चेकोस्लोवाकिया का हिस्सा रहा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह नाजी जर्मनी के प्रभाव में भी रहा और बाद में सोवियत संघ के प्रभाव वाले कम्युनिस्ट शासन के अधीन आ गया।

वर्ष 1989 में हुए ‘वेलवेट रिवोल्यूशन’ ने देश में लोकतंत्र की नींव रखी। इसके बाद 1 जनवरी 1993 को ‘वेलवेट डिवोर्स’ के तहत चेकोस्लोवाकिया शांतिपूर्वक दो देशों—चेक गणराज्य और स्लोवाकिया—में विभाजित हो गया। इस विभाजन के दौरान न कोई युद्ध हुआ और न ही खून-खराबा।

ऑटोमोबाइल उद्योग ने बदली देश की तस्वीर

स्वतंत्रता के बाद स्लोवाकिया ने तेजी से आर्थिक विकास किया और आज यह दुनिया के सबसे बड़े प्रति व्यक्ति कार उत्पादक देशों में शामिल है। फॉक्सवैगन, किया, जगुआर लैंड रोवर और स्टेलेंटिस जैसी वैश्विक कंपनियों के उत्पादन केंद्र यहां स्थापित हैं।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अलावा इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, पर्यटन और सेवा क्षेत्र भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य बनने के बाद स्लोवाकिया ने खुद को एक स्थिर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।

भारत के लिए क्यों खास है स्लोवाकिया

भारत ने स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के कुछ ही दिनों बाद उसे मान्यता दे दी थी और वर्ष 1993 में ही वहां अपना दूतावास स्थापित कर लिया था। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं।

साल 2025 में भारत और स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.8 अरब यूरो तक पहुंच गया। भारत मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और स्पेयर पार्ट्स का निर्यात करता है, जबकि स्लोवाकिया भारत को लक्जरी वाहन और उच्च मूल्य वाले ऑटो उत्पाद भेजता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्लोवाकिया भारत के लिए यूरोपीय बाजार में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण द्वार साबित हो सकता है। रक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के सहयोग की नई संभावनाएं उभर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को इसी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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