कभी 600 घरों की प्यास बुझाने वाला ऐतिहासिक कुआं आज उपेक्षा का शिकार, संरक्षण की उठी मांग

जगदलपुर का एक ऐतिहासिक जल स्रोत इन दिनों फिर चर्चा में है। शहर के जल संकट के बीच 111 वर्ष पुराना विशाल कुआं अपनी उपेक्षित स्थिति के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। कभी यह कुआं सैकड़ों घरों तक पेयजल पहुंचाने का प्रमुख माध्यम था, लेकिन वर्तमान में इसके संरक्षण और उपयोग को लेकर कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
दशकों तक शहर की जलापूर्ति का रहा आधार
दलपत सागर के किनारे स्थित इस कुएं से वर्षों तक शहर के करीब 600 घरों को पानी उपलब्ध कराया जाता था। वर्ष 1916 में स्थापित फिल्टर प्लांट के माध्यम से कुएं के पानी को शुद्ध कर घरों तक पहुंचाया जाता था। यह व्यवस्था लंबे समय तक शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करती रही और उस दौर में जल प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती थी।
नई जलापूर्ति व्यवस्था के बाद बंद हुआ उपयोग
वर्ष 1962 में इंद्रावती नदी से नई जलापूर्ति व्यवस्था शुरू होने के बाद इस कुएं का उपयोग धीरे-धीरे बंद हो गया। वर्तमान में भी कुआं पानी से भरा हुआ है, लेकिन उसका कोई नियमित उपयोग नहीं हो रहा है। शहर के अन्य पुराने कुओं की तरह यह जल स्रोत भी रखरखाव और सफाई के अभाव में उपेक्षा का सामना कर रहा है।
संरक्षण और पुनर्जीवन की मांग तेज
स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस कुएं का उपयोग निस्तारी और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। जल विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते जल संकट के दौर में ऐसे पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन बेहद जरूरी है। लोगों का कहना है कि जब जल उपलब्ध है, तो उसके बेहतर उपयोग और संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।











