ब्राह्मण बेटियों पर टिप्पणी का मामला तूल पकड़ता जा रहा, आईएएस संतोष वर्मा पर एफआईआर का दबाव बढ़ा

ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के बाद आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। बयान को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और राज्य सरकार पर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है। सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों की ओर से एफआईआर दर्ज कराने की मांग की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने संतोष वर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू जरूर की है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने पुलिस थानों में आवेदन दिए हैं और सरकार पर कार्रवाई को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। विधानसभा का बजट सत्र नजदीक होने के चलते यह मुद्दा सदन में उठने की संभावना भी जताई जा रही है।
विवाद की जड़ उस बयान से जुड़ी है, जो संतोष वर्मा ने एक प्रांतीय अधिवेशन के दौरान आरक्षण के समर्थन में बोलते हुए दिया था। इस बयान को लेकर सवर्ण समाज में आक्रोश फैल गया और प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए। संगठनों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी सेवा शर्तों का उल्लंघन है और इसे केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यदि ऐसा बयान किसी अन्य वर्ग के व्यक्ति द्वारा दिया गया होता तो अब तक सख्त कार्रवाई हो चुकी होती। इसी को लेकर सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब यह मामला भी सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। राजनीतिक और सामाजिक दबाव के चलते आने वाले दिनों में संतोष वर्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की दिशा में कोई निर्णय लिया जा सकता है।











