अमेरिका-ईरान टकराव में फिलहाल युद्धविराम की उम्मीद कम, कई वजहें बनीं बाधा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दुनिया भर में यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों देशों के बीच जल्द युद्धविराम हो सकता है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल सीजफायर की संभावना कम दिखाई दे रही है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति और शर्तों पर अड़े हुए हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी नेतृत्व अभी युद्ध रोकने को लेकर स्पष्ट रुख में नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि कई लक्ष्य हासिल हो चुके हैं, लेकिन अभी युद्ध रोकना सही नहीं होगा। माना जा रहा है कि अमेरिका बिना किसी बड़े रणनीतिक लाभ के इस संघर्ष से पीछे हटना नहीं चाहता, खासकर तब जब इस अभियान पर भारी खर्च हो चुका है।
दूसरी ओर ईरान भी समझौते के लिए कुछ शर्तों पर जोर दे रहा है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि किसी भी बातचीत से पहले ईरान को एक संप्रभु देश के रूप में उसके अधिकारों की मान्यता, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में हमलों से सुरक्षा की गारंटी दी जानी चाहिए।
ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका बातचीत की बात करता है, लेकिन साथ ही सैन्य कार्रवाई भी जारी रखता है, जिससे विश्वास की स्थिति कमजोर हुई है।
इस संघर्ष में इजराइल की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। अमेरिका अपने सहयोगी देश इजराइल के साथ समन्वय बनाकर फैसले ले रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक इजराइल फिलहाल युद्धविराम के पक्ष में नहीं है और वह क्षेत्र में ईरान समर्थित सैन्य ढांचे को कमजोर करना चाहता है।
इसके अलावा वैश्विक तेल संकट के बावजूद अमेरिका पर तत्काल बड़ा दबाव नहीं दिखाई दे रहा है। ऊर्जा भंडार और वैकल्पिक संसाधनों के कारण अमेरिका फिलहाल स्थिति को संभालने में सक्षम है, जिससे युद्धविराम के लिए जल्दबाजी की संभावना कम मानी जा रही है।











