बारिश-सूखा से फसल खराब होने पर नहीं होगा नुकसान, फसल बीमा बनेगा किसानों की ढाल

खेती-किसानी में मौसम का कोई भरोसा नहीं रहता, इसलिए फसल बीमा को ‘खर्च’ नहीं बल्कि अपनी गाढ़ी कमाई का ‘सुरक्षा कवच’ समझें। मानसून में भारी बारिश या सूखा से होने वाले नुकसान से बचने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) सबसे बड़ा सहारा है।
केसीसी वाले ऋणी किसानों का प्रीमियम बैंक स्वतः काट लेते हैं। लेकिन यदि आप बीमा नहीं चाहते तो तय समय सीमा से पहले बैंक को लिखित में मना करना होगा। वहीं गैर-ऋणी और बटाईदार किसान नजदीकी चॉइस सेंटर (सीएससी) या बैंक जाकर बेहद मामूली यानी सिर्फ 2% प्रीमियम राशि देकर धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों का रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। आवेदन के तुरंत बाद पावती और रसीद लेना न भूलें, यह क्लेम का सबसे पुख्ता सबूत है।
नुकसान होने पर क्या करें ?: यदि ओलावृष्टि या जलभराव से फसल खराब होती है, तो 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देना अनिवार्य है। किसान सीधे टोल-फ्री नंबर 14447 या ‘क्रॉप इंश्योरेंस ऐप’ के जरिए शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय पर सर्वे होकर क्लेम की राशि सीधे आपके बैंक खाते में आ सके।
बीमा प्रक्रिया: लोन लेने पर स्वैच्छिक
फसली लोन लेने वालों के लिए : बीमा स्वैच्छिक है, लेकिन वित्तीय संस्थान (बैंक/सहकारी समिति/जन सेवा केंद्र/पोस्ट ऑफिस/बीमा कंपनी) से फसली लोन लेने वाले किसान यदि बीमा नहीं करवाना चाहते हैं, तो बीमा अवधि की अंतिम तारीख से 7 दिन पहले संबंधित संस्थान को लिखित में देना होगा।
फसली लोन नहीं लेने वालों के लिए : फसली लोन नहीं लेने वालों के लिए नजदीकी बैंक सहकारी समिति/जन सेवा केंद्र/पोस्टऑफिस/बीमा कंपनी या उनके अधिकृत एजेंट से करवा सकते हैं। राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल http:/www.mfby.gov.in और फसल बीमा एप पर आवेदन कर सकते हैं।
– अंतिम तारीख से 2 दिन पहले तक बीमित – फसल में परिवर्तन भी किया जा सकता है।
मुआवजे की प्रक्रिया: इसे देने के 3 आधार
जब बुवाई ही नहीं हुई हो : केवल खरीफ की प्रमुख फसलों के लिए क्षेत्रीय दृष्टिकोण के आधार पर। कम वर्षा या अन्य प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण बुवाई नहीं हो पाई हो, कुछ हिस्से में ही बुवाई हो पाई हो। ऐसे कारण हों तो बीमित राशि का 25% तक भुगतान।
खड़ी फसल (बुवाई से कटाई तक) : केवल अधिसूचित क्षेत्र और फसलों के आधार पर। सूखा, बाढ़, कीटों व रोगों के प्रभाव, भू-स्खलन, आकाशीय बिजली गिरने से प्राकृतिक आग, तूफान, ओलावृष्टि और चक्रवात के कारण नुकसान होने पर।
फसल कटाई के बाद : नुकसान केवल अधिसूचित क्षेत्र और फसलों के आधार पर। ओलावृष्टि, चक्रवात, चक्रवाती बारिश और बेमौसम बारिश होने पर खेत में काटकर और फैलाकर छोटे गठुरों में बांधकर सुखाने के लिए रखी गई फसलों के लिए कटाई के बाद अधिकतम 14 दिन में नुकसान होने पर।
किसानों के लिए प्रीमियम और लाभ
कम लागत में सुरक्षा- छत्तीसगढ़ के किसानों को भी खरीफ के लिए 2% प्रीमियम देना होता है। बाकी का बड़ा हिस्सा केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार मिलकर वहन करती है।
प्रीमियम राशि – सिंचित व असिंचिंत क्षेत्र के हिसाब से जिले में घट-बढ़ सकती है। उसी अनुपात में केंद्र व राज्य सरकार भी प्रीमियम जमा करवाती हैं।
इन फसलों का करा सकते हैं बीमा
खरीफ फसल – धान, बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, मूंगफली, हरी मिर्च, प्याज, टमाटर।
बीमा के लिए तय तारीख : खरीफ फसल बीमा की अंतिम तिथि आमतौर पर 31 जुलाई होती है। मौसम और सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार इन तारीखों में कभी-कभी बदलाव भी किया जाता है।
बारिश से फसल खराब हुई, बीमा कराने के कारण मिला मुआवजा
कंडेल के किसान घनाराम साहू बताते हैं कि खरीफ वर्ष 2025-26 में उन्होंने पहले ही फसल बीमा करा लिया था। इस साल बारिश से फसल को नुकसान हुआ। कुछ हिस्से की फसल बच गई। लेकिन कुछ हिस्से की फसल खराब हो गई। बीमा कराने का फायदा यह हुआ कि मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हुई। 10 जून को बैंक खाते में 7500 रुपए मुआवजा आया। दूसरे रकबे का मुआवजा आना बाकी है।











