हीरो-प्रधान बॉलीवुड में इन अभिनेत्रियों ने बदला खेल, अपने दम पर बनाई पहचान

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का इतिहास एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। लंबे समय तक बॉलीवुड को हीरो-प्रधान इंडस्ट्री माना जाता रहा, जहां फिल्मों का केंद्र अक्सर पुरुष अभिनेता होते थे। बॉक्स ऑफिस की सफलता का श्रेय भी ज्यादातर हीरो को ही मिलता था, जबकि अभिनेत्रियों के किरदार अक्सर सहायक भूमिका तक सीमित रह जाते थे।
समय के साथ इस परंपरा में बदलाव आया और कई अभिनेत्रियों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने न सिर्फ दमदार किरदारों का चुनाव किया बल्कि यह भी साबित किया कि फिल्में सिर्फ बड़े हीरो के सहारे ही सफल नहीं होतीं। इन अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय, चयन और मेहनत से इंडस्ट्री की सोच को बदलने में अहम भूमिका निभाई।
दीपिका पादुकोण का नाम इस बदलाव के प्रमुख चेहरों में शामिल है। उन्होंने साल 2007 में फिल्म ‘ओम शांति ओम’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। बताया जाता है कि इस फिल्म के लिए उन्होंने कोई फीस नहीं ली थी। इसके बाद उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में काम किया और आज वह बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। ‘पठान’, ‘जवान’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ जैसी फिल्मों के जरिए वह हजार करोड़ क्लब का हिस्सा बनने वाली फिल्मों से जुड़ी रही हैं।
विद्या बालन ने भी अपने दम पर फिल्मों की सफलता का नया उदाहरण पेश किया। ‘कहानी’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’ और ‘द डर्टी पिक्चर’ जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और साबित किया कि महिला केंद्रित फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर सफल हो सकती हैं। ‘द डर्टी पिक्चर’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
माधुरी दीक्षित ने 90 के दशक में अपनी लोकप्रियता के दम पर अलग पहचान बनाई। ‘धक धक’ गाने के बाद उन्हें ‘धक धक गर्ल’ के नाम से पहचान मिली। उस दौर में वह कई बड़े अभिनेताओं से ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं। फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ की सफलता ने उन्हें इंडस्ट्री की सबसे बड़ी स्टार अभिनेत्रियों में ला खड़ा किया।
कंगना रनौत भी उन अभिनेत्रियों में हैं जिन्होंने महिला प्रधान फिल्मों को नई पहचान दी। ‘क्वीन’, ‘तनु वेड्स मनु’ और ‘गैंगस्टर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। उन्हें चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है, जो उनके अभिनय कौशल का प्रमाण माना जाता है।
प्रियंका चोपड़ा ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा को नई पहचान दिलाई। फिल्म ‘फैशन’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में सक्रिय हैं और वैश्विक मंच पर भारतीय कलाकारों का प्रतिनिधित्व करती रही हैं।
तापसी पन्नू ने भी अलग तरह की फिल्मों का चयन कर अपनी पहचान बनाई है। ‘पिंक’, ‘थप्पड़’ और ‘मुल्क’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने सामाजिक मुद्दों को पर्दे पर मजबूती से पेश किया। उनकी फिल्मों में अक्सर समाज से जुड़े गंभीर विषय देखने को मिलते हैं।
आलिया भट्ट ने कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में बड़ी सफलता हासिल की है। ‘हाईवे’, ‘उड़ता पंजाब’, ‘राजी’ और ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है।
श्रद्धा कपूर ने भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। उनकी फिल्म ‘स्त्री 2’ ने दुनियाभर में 800 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। इस फिल्म की सफलता ने यह साबित किया कि महिला केंद्रित फिल्में भी बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकती हैं।
इन अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय और फिल्मों के चयन से यह साबित किया है कि बॉलीवुड अब केवल हीरो के इर्द-गिर्द नहीं घूमता। आज फिल्मों में महिलाओं की कहानियां भी उतनी ही प्रभावशाली तरीके से सामने आ रही हैं और दर्शकों द्वारा सराही जा रही हैं।











