उमरिया: बिजली, सड़क और पेयजल की समस्याओं से जूझ रहे आदिवासी गांव, कलेक्टर से लगाई गुहार, 15 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

उमरिया: एक तरफ सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने की बात करती है तो वहीं मध्यप्रदेश के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उमरिया जिले के पाली विकासखंड के कई आदिवासी गांवों में बिजली, सड़क, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है।

बता दें कि ग्राम पंचायत कठई के चिनकी, सांस और बिजली सहित गजवाही एवं पैली गांवों की समस्याओं को लेकर आदिवासी कांग्रेस ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपा है। संगठन ने प्रशासन का ध्यान ग्रामीणों की समस्याओं की ओर आकर्षित कर जल्द समाधान की मांग की है।

आदिवासी कांग्रेस की ओर से दिये गये आवेदन में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इन गांवों में बैगा और गौंड आदिवासी परिवार पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं। लेकिन आज आज भी कई जरूरी सुविधाएं ग्रामीण वंचित हैं। संगठन ने प्रशासन से इन गांवों की वास्तविक स्थिति का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण कराने की मांग की है।

बिजली और सड़क की समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीण

आवेदन के अनुसार, कठई के चिनकी, सांस और बिजली गांवों में विद्युतीकरण की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों को अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है। बिजली के साथ-साथ पक्की सड़क और पेयजल की सुविधा को लेकर भी परेशानी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण संचार व्यवस्था भी प्रभावित होती है।

वहीं ग्राम गजवाही में गौंड आदिवासी परिवारों के बीच बिजली की समस्या का मुद्दा उठाया गया है। पैली गांव में भी सड़क और बिजली की सुविधाओं के अभाव की बात आवेदन में कही गई है। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में सड़क और संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने से आवागमन में परेशानी और बढ़ जाती है।

ग्रामीणों को नहीं मिल रहा स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ

वहीं आवेदन में स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया है। आवेदन के अनुसार, ग्रामीण को स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं को लाभ नहीं मिल रहा है। अगर किसी भी प्रकार की बीमारी या दिक्कत होती है तो शहर का रूख करना होता है। ग्रामीणों के अनुसार गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

आदिवासी कांग्रेस ने 15 दिन का दिया अल्टीमेटम

आदिवासी कांग्रेस ने कलेक्टर से मांग की है कि प्रशासनिक दल भेजकर सभी प्रभावित गांवों का भौतिक निरीक्षण कराया जाए और बिजली, सड़क, पेयजल तथा मोबाइल नेटवर्क की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाए। संगठन ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।

 

उमरिया रिपोर्टर- ब्रजेश श्रीवास्तव

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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