सूरजपुर में टेंडर पर बवाल! बिना सूचना बदली तारीख, प्रक्रिया पर लगे गंभीर आरोप

सूरजपुर :  नगर पंचायत प्रेमनगर में 66 लाख रुपये के निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया अब बड़े विवाद में घिर गई है.पूरी प्रक्रिया पर पारदर्शिता की जगह मनमानी और पक्षपात के आरोप लग रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
एसआरएल के प्रोपराइटर प्रतीक डालमिया ने कलेक्टर को शपथपत्र सहित शिकायत सौंपते हुए निविदा को निरस्त करने की मांग की है.

उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 2026 को नगर पंचायत द्वारा 7 निर्माण कार्यों के लिए लगभग 66 लाख 9 हजार रुपये की निविदा जारी की गई थी, जिसमें सीसी रोड, यात्री प्रतीक्षालय और अन्य जोनल कार्य शामिल थे.

निविदा शर्तों के अनुसार 13 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे निविदा खोली जानी थी, लेकिन तय समय पर प्रक्रिया नहीं की गई. आरोप है कि बिना किसी सार्वजनिक सूचना के तिथि आगे बढ़ा दी गई और न तो निविदाकारों को जानकारी दी गई और न ही जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया.बाद में 17 मार्च को निविदा खोली गई, जिसकी सूचना भी संबंधित प्रतिभागियों को नहीं दी गई.

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पूरी प्रक्रिया को सीमित दायरे में रखते हुए मात्र एक ही निविदाकार की उपस्थिति में निविदा खोली गई और उसी को कार्य आवंटित कर दिया गया.इससे प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई, जो निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करता है.

प्रतीक डालमिया ने यह भी आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों को हस्ताक्षर मेल न खाने के आधार पर निरस्त कर दिया गया, जबकि उन्होंने शपथपत्र में स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर उनके ही हैं.उन्होंने यह भी बताया कि वे हिंदी और अंग्रेजी दोनों में हस्ताक्षर करते हैं और इसके समर्थन में नोटरीकृत दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं.

मामले ने तूल तब पकड़ा जब आम नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निविदा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी सार्वजनिक करने की मांग कर दी.उनका कहना है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो गड़बड़ियों को छुपाने की कोशिश की जा सकती है.

इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय, एसडीएम रामानुजनगर और नगर पंचायत प्रेमनगर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को शिकायत दी गई है. शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि विवादित निविदा को तत्काल निरस्त कर स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.

प्रेमनगर की यह निविदा अब पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुकी है.अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या इस मामले में सच्चाई सामने आ पाएगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा.

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