उत्तर प्रदेश: गरीबी को दी मात, संघर्ष से रचा इतिहास, बलिया के एक ही गांव के 3 युवाओं ने एक साथ बढ़ाया मान

बलिया: कहते हैं कि पसीने की स्याही से जो लिखते हैं अपने इरादों को, उनके मुकद्दर के सफेद पन्ने कभी कोरे नहीं रहते. खबर यूपी के बलिया जनपद से है. सोहांव ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले नसीरपुर कला गांव ने आज इस बात को सच कर दिखाया है. इस गांव के तीन होनहार युवाओं ने एक साथ सफलता की ऐसी इबारत लिखी है, जिसकी गूँज पूरे जनपद में सुनाई दे रही है.
सब्जी बेचने वाले का बेटा बना परमाणु वैज्ञानिक
इस सफलता की कहानी में सबसे भावुक कर देने वाला अध्याय सुधांशु कुमार कश्यप का है. सुधांशु के पिता ने ताउम्र सब्जी बेचकर और पाई-पाई जोड़कर बेटे को इस काबिल बनाया कि आज सुधांशु का चयन परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) में सहायक वैज्ञानिक के पद पर हुआ है. पिता के संघर्ष और बेटे के समर्पण ने गरीबी की बेड़ियों को काटकर सफलता का नया आसमान छुआ है.
देश सेवा और विकास की राह पर ‘नसीरपुर के रत्न’
सफलता का यह कारवां यहीं नहीं थमा. गांव के ही चंदन सिंह ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देश सेवा का मार्ग चुना है. उनकी इस उपलब्धि से गांव का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है. वहीं, तीसरे रत्न अंकित कुमार सिंह ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में विकास अधिकारी का पद हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.
सम्मान से छलकी खुशी के आंसू
इन युवाओं की ऐतिहासिक उपलब्धि पर गांव के पंचायत भवन में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया. ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने इन तीनों प्रतिभाओं का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया.
प्रधान प्रतिनिधि दीपक कुमार सिंह ने कहा इन युवाओं ने न केवल अपने माता-पिता का, बल्कि पूरे बलिया का नाम रोशन किया है. यह जीत हर उस छात्र की जीत है जो अभावों में रहकर भी बड़े सपने देखता है.