उत्तर प्रदेश: एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अभिमन्यु मांगलिक बने फतेहपुर एसपी, सात साल का करियर… 41 एनकाउंटर

फतेहपुर: उत्तर प्रदेश पुलिस के तेजतर्रार और सख्त छवि वाले 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिमन्यु मांगलिक आज अपराधियों के लिए किसी खौफ से कम नहीं हैं. महज 34 साल की उम्र में अपने 7 साल के पुलिस करियर में 41 एनकाउंटर कर चुके अभिमन्यु मांगलिक की पहचान एक ऐसे अफसर के रूप में बन चुकी है, जिनके नाम से ही बदमाशों की सांसें अटक जाती हैं.

बता दें बीते दिन शुक्रवार को शासन द्वारा आईपीएस ताबदाला सूची में फतेहपुर एसपी अनूप सिंह को लखनऊ मुख्यालय सम्बंध कर दिया भदोही जनपद में तैनात अभिमन्यु मांगलिक को फतेहपुर का एस पी बनाया गया है.

कहा जाता है कि जब अभिमन्यु मांगलिक अपनी रणनीति का चक्रव्यूह बुनते हैं तो बड़े से बड़ा अपराधी भी उसमें फंसकर पानी मांगते हुए सरेंडर करने को मजबूर हो जाता है। युवा सोच और तेज दिमाग के साथ क्रिमिनल केस सुलझाने वाले इस आईपीएस अधिकारी का साफ कहना है “जिस दिन इंसान हार मान लेता है, उसी दिन सफलता उससे दूर हो जाती है.”

वर्तमान में अभिमन्यु मांगलिक भदोही जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह करीब 26 महीनों तक सहारनपुर में एसपी सिटी रहे और अपने सख्त एक्शन से माफिया और अपराधियों की कमर तोड़ दी। इतना ही नहीं, वह राज्यपाल के एडीसी (एड-डी-कैंप) की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। सहारनपुर में माफिया की जमीन खरीदने वाले एक इंस्पेक्टर को उनकी रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्त कर दिया गया था.

सीए से आईपीएस बनने तक का सफर
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की टीचर्स कॉलोनी में जन्मे अभिमन्यु मांगलिक के पिता प्रमोद मांगलिक पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. 2 फरवरी 1991 को जन्मे अभिमन्यु बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई बुलंदशहर के निर्मल कॉन्वेंट स्कूल में हुई.
2007 में उन्होंने सीबीएसई बोर्ड से हाईस्कूल फर्स्ट डिवीजन में पास किया और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली भेज दिए गए. दिल्ली के दिल्ली पब्लिक स्कूल से 2009 में इंटरमीडिएट पास करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 2012 में बीकॉम की डिग्री हासिल की.
इसके बाद 2013 में उन्होंने दिल्ली से चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) पूरी की और उन्हें निजी क्षेत्र की कंपनियों से आकर्षक नौकरी के ऑफर मिलने लगे. उसी साल उन्होंने आरईसीएल (RECL) में करीब 16 लाख रुपए सालाना पैकेज पर नौकरी शुरू कर दी.

मोटी सैलरी छोड़ी, खाकी को चुना
मोटी सैलरी और शानदार करियर के बावजूद अभिमन्यु मांगलिक का मन प्राइवेट नौकरी में नहीं लगा. उन्हें महसूस हुआ कि असली संतोष समाज के लिए काम करने में है। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.
शुरुआत में उन्होंने नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी, लेकिन 2016 में बड़ा फैसला लेते हुए नौकरी छोड़ दी और पूरी ताकत के साथ यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। कड़ी मेहनत रंग लाई और आखिरकार उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना पूरा कर लिया.

बरेली में ड्रग्स माफिया पर चला शिकंजा
ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग बरेली में हुई. यहां फरीदपुर और आसपास के इलाकों में ड्रग्स का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था. अभिमन्यु मांगलिक ने गैंग्स की लिस्टिंग कराई, मुखबिर तंत्र मजबूत किया और सिविल ड्रेस में टीमों को तैनात कर दिया.
महज तीन महीने के अभियान में पुलिस ने 8 बड़े गैंग्स के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 200 से ज्यादा ड्रग्स डीलरों पर शिकंजा कस दिया. कई बड़े माफिया जिला छोड़कर फरार हो गए.

वाराणसी में डेढ़ लाख के इनामी को किया ढेर
इसके बाद उनकी पोस्टिंग वाराणसी में एएसपी कैंट के रूप में हुई. नवंबर 2020 में कुख्यात बदमाश मोनू चौहान अपने गैंग के साथ व्यापारियों से लूट और फायरिंग की घटनाओं से दहशत फैला रहा था. सारनाथ क्षेत्र में पुलिस चेकिंग के दौरान मोनू चौहान ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें एक कॉन्स्टेबल और दरोगा घायल हो गए. इसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला और करीब 20 मिनट तक चली भीषण मुठभेड़ में मोनू चौहान को गोली लगी.

घायल बदमाश को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से पुलिस ने पिस्टल, कारतूस और बाइक बरामद की. मोनू चौहान के खिलाफ हत्या, लूट और गैंगवार समेत 18 संगीन मुकदमे दर्ज थे और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था.

अपराधियों के लिए बना खौफ का दूसरा नाम
आज महज 7 साल के करियर में 41 एनकाउंटर कर चुके आईपीएस अभिमन्यु मांगलिक की गिनती यूपी पुलिस के सबसे सख्त और जांबाज अधिकारियों में होने लगी है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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