क्यों कहलाते हैं हनुमान जी रुद्र अवतार? जानें महादेव से मिला था क्या खास वरदान

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती का पावन पर्व भक्तों के लिए बहुत ही विशेष माना जाता है. इस दिन लोग बजरंगबली की पूजा-अर्चना कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हनुमान जी को रुद्र अवतार क्यों कहा जाता है? इसके पीछे एक बहुत ही रोचक और आध्यात्मिक कथा छिपी हुई है, जो भगवान शिव और माता अंजनी से जुड़ी है. आइए जानते हैं इस रहस्य से जुड़ी पूरी कहानी और वह विशेष वरदान, जिसने हनुमान जी को अद्वितीय बना दिया.

क्यों कहलाते हैं हनुमान जी शिव के 11वें रुद्र अवतार?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार माने जाते हैं. शिव पुराण के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने राम अवतार लेने का निश्चय किया, तो महादेव के मन में भी उनकी सेवा करने की इच्छा जाग्रत हुई. महादेव जानते थे कि भगवान राम का कार्य बहुत ही कठिन होगा और उसमें एक ऐसे सहायक की आवश्यकता होगी जो बल, बुद्धि में अद्वितीय हो. चूंकि शिव और विष्णु एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए भगवान शिव ने अपने अंश से हनुमान के रूप में अवतार लिया ताकि वे प्रभु श्री राम की सेवा कर सकें.

कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म?

हनुमान जी के जन्म के पीछे माता अंजनी की कठोर तपस्या और महादेव के वरदान की एक रोचक कथा है. माता अंजना एक अप्सरा थीं जिन्हें श्राप के कारण वानर रूप प्राप्त हुआ था. पुत्र प्राप्ति के लिए उन्होंने मतंग ऋषि के सुझाव पर भगवान शिव की घोर तपस्या की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए और उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया. महादेव ने कहा कि वे स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे.

उसी समय अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कर रहे थे. अग्नि देव से प्राप्त खीर का एक भाग एक चील लेकर उड़ गई और उसे वहां गिरा दिया जहां अंजनी तपस्या कर रही थीं. वायु देव (पवन देव) के वेग से वह खीर माता अंजनी के हाथों में आ गिरी. उसे ग्रहण करने के बाद माता अंजनी के गर्भ से शिव के अंश स्वरूप हनुमान जी का जन्म हुआ. यही कारण है कि उन्हें अंजनी पुत्र और पवनपुत्र दोनों कहा जाता है.

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