इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 मौतें, हाई कोर्ट में 500 पन्नों की रिपोर्ट पेश; तत्कालीन अफसरों की भूमिका पर उठे सवाल

इंदौर, 21 अगस्त 2026। भागीरथपुरा में दिसंबर-जनवरी के दौरान दूषित पानी पीने से हुई 36 मौतों के मामले में जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश कर दी है। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में गठित एक सदस्यीय आयोग ने 500 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी है।
हाई कोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को मामले की जांच के लिए आयोग का गठन किया था। आयोग ने नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के साथ प्रभावित लोगों और आम नागरिकों के बयान भी दर्ज किए।
किसकी लापरवाही, रिपोर्ट में तय होगी जिम्मेदारी
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि भागीरथपुरा में पानी आखिर किस वजह से दूषित हुआ और क्या दूषित पानी ही मौतों का मुख्य कारण था। इसके साथ ही पानी में सीवेज मिलने, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने, औद्योगिक प्रदूषण या किसी अन्य स्रोत की संभावना की भी जांच की गई।
रिपोर्ट में तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों, पार्षदों और जलकार्य समिति से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की गई है। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और कार्यपालन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव की जिम्मेदारी तय होने की संभावना है।
इन अहम बिंदुओं पर हुई जांच
आयोग ने दूषित पानी के स्रोत और उसकी प्रकृति, दूषित पानी से होने वाली बीमारी, वास्तविक मौतों की संख्या और घटना के लिए प्रथमदृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की पहचान जैसे बिंदुओं पर जांच की है। प्रभावित लोगों को दिए जाने वाले मुआवजे के मुद्दे को भी जांच में शामिल किया गया।
रिपोर्ट फिलहाल पूरी तरह गोपनीय रखी गई है। अदालत ही तय करेगी कि रिपोर्ट कब और किस तरीके से सार्वजनिक की जाएगी तथा इसकी प्रति मामले से जुड़े पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाएगी।
अब इस मामले में 25 अगस्त को हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। कई जनहित याचिकाएं पहले से ही भागीरथपुरा दूषित जल कांड को लेकर अदालत में लंबित हैं।











