बंगाल में 61 लाख संदिग्ध मतदाता न्यायिक जांच के दायरे में, मंजूरी के बाद ही कर सकेंगे मतदान

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी नई मतदाता सूची में 61 लाख संदिग्ध मतदाताओं की पहचान की गई है। इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार नियुक्त न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिया गया है। अब इन मतदाताओं को मतदान का अधिकार तभी मिलेगा, जब उनके दावों को मंजूरी देकर पूरक सूची में शामिल किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान आश्वस्त किया था कि मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों द्वारा दायर दावों और आपत्तियों की जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सत्यापन के दौरान नागरिकता और पहचान से जुड़े वैध दस्तावेजों को स्वीकार किया जाएगा।

चुनाव अधिकारियों के अनुसार, नवंबर में शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद करीब 63.66 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इससे पहले 16 दिसंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटाकर 7.08 करोड़ कर दी गई थी। मौत, स्थानांतरण, डुप्लीकेशन और अन्य कारणों से 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे।

सुनवाई और दावों के निपटारे के बाद Form-7 के जरिए 5,46,053 अतिरिक्त नाम हटाए गए। वहीं Form-6 और Form-6A के माध्यम से 1.82 लाख से अधिक नए मतदाता जोड़े गए, जिससे कुल संख्या में आंशिक संतुलन आया।

फिलहाल राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7.04 करोड़ से अधिक है। लगभग 60.06 लाख मतदाताओं को “अंडर एडजुडिकेशन” श्रेणी में रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक इनके एन्यूमरेशन फॉर्म में तार्किक त्रुटियां पाई गई हैं और जांच पूरी होने तक इन्हें अंतिम सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।

चुनाव प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि SIR का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है। दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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