UNGA81: भारत की कूटनीति का यूरोप में विस्तार, V4 देशों के साथ रणनीतिक सहयोग पर जोर

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूरोप के कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अहम द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की है. सबसे अहम बैठक Visegrád Group (V4) और भारत के पहले विदेश मंत्रिस्तरीय प्रारूप की रही, जिसमें पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के साथ भारत ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.
V4+India बैठक में भारत के साथ पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने राजनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. इसके तहत विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा आर्थिक संबंधों को गति देने के लिए Annual Business Forum शुरू करने, तकनीक, इनोवेशन, रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने तथा रक्षा सहयोग को फिर से गति देने पर भी सहमति बनी.
भारत और V4 देशों ने सांस्कृतिक सहयोग और People-to-People Relations को बढ़ाने तथा बहुपक्षीय संस्थाओं में मिलकर काम करने पर भी जोर दिया. स्लोवाकिया के विदेश मंत्री Juraj Blanár ने कहा कि V4 देशों की साझा राय है कि Global South के महत्वपूर्ण देश और Indo-Pacific में उभरती शक्ति के तौर पर भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में स्थान मिलना चाहिए.
UNSC में भारत की दावेदारी का समर्थन दोहराया
UNGA के हाई लेवल वीक की शुरुआत से पहले जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot के साथ भी मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर चर्चा हुई. फ्रांस पहले भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन कर चुका है. बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई. वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अगले साल की शुरुआत में भारत दौरे की संभावित संभावना भी अहम है.
यूरोपीय संघ के सहयोगियों से भी चर्चा
जयशंकर ने न्यूयॉर्क में यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों के साथ बैठक में भारत-EU सहयोग, बहुपक्षीय मुद्दों और खाड़ी, यूक्रेन तथा Indo-Pacific में मौजूदा घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया. हंगरी की उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री Anita Orbán के साथ पहली बैठक में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने तथा भारत-EU Strategic Partnership को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी. स्लोवाकिया के विदेश मंत्री Juraj Blanár के साथ जयशंकर ने द्विपक्षीय एजेंडे के साथ-साथ बहुपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की.
स्विट्जरलैंड के साथ EFTA समझौते पर फोकस
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री Ignazio Cassis के साथ बैठक में दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों की समीक्षा की गई. खास तौर पर India-EFTA Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) के लागू होने के बाद आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय मंचों पर भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार किया.
मोल्दोवा और इक्वाडोर के साथ भी अहम बातचीत
मोल्दोवा के विदेश मंत्री Mihai Popșoi के साथ बैठक में भारत-मोल्दोवा के राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई. दोनों पक्षों ने यूक्रेन संघर्ष पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. इक्वाडोर के विदेश मंत्री Gabriela Sommerfeld के साथ बातचीत में भारत-इक्वाडोर आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर जोर रहा. इसमें ऊर्जा, फार्मास्युटिकल्स, मोबिलिटी, प्रशिक्षण और विकास साझेदारी जैसे क्षेत्र शामिल रहे. दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र समेत बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की.
नाउरू के साथ विकास साझेदारी पर जोर
जयशंकर ने नाउरू के राष्ट्रपति David Adeang से भी मुलाकात की. इस दौरान भारत-नाउरू के बीच मजबूत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को रेखांकित किया गया. भारत ने नाउरू के साथ अपनी Development Partnership के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई. कुल मिलाकर, UNGA81 के दौरान जयशंकर की बैठकों में यूरोप के साथ भारत के रिश्तों को नई गति देने, V4 देशों के साथ संस्थागत सहयोग बढ़ाने, UNSC सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को आगे बढ़ाने तथा आर्थिक, तकनीकी, रक्षा और विकास साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिखाई दिया.











