COVID काल में निजामुद्दीन मरकज जाने पर दर्ज केस रद्द, इलाहाबाद HC बोला- गलत तरीके से फंसाया गया

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों को अनुमान और धारणा के आधार पर गलत तरीके से फंसाया गया. अदालत ने सख्त लहजे में इस कार्रवाई को कानून का सीधा दुरुपयोग करार दिया.
इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी की पीठ ने 18 सितंबर को फैसला सुनाते हुए जौनपुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के समक्ष लंबित मुकदमे को खारिज कर दिया. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अगर इस तरह की कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया तो यह अदालत और कानून की प्रक्रिया का सीधा दुरुपयोग होगा.
दोनों लोगों को झूठे-बेबुनियाद आरोपों में फंसाया
कोर्ट ने माना कि दोनों लोगों को दुर्भावना और अनुचित मंशा के तहत झूठे व बेबुनियाद आरोपों में फंसाया गया था. बेंच ने दुर्भावनापूर्ण इरादे और केवल अनुमान के आधार पर दर्ज FIR और कार्यवाही को खारिज किया, क्योंकि लैब टेस्ट में भी कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई थी. पुलिस ने कोरोना के दौरान मरकज में शामिल होने और संक्रमण फैलाने की आशंका को लेकर मुकदमा दर्ज किया था.
कोर्ट ने कहा कि उन्हें अनुमान और मान्यता के आधार पर गलत तरीके से फंसाया गया था. इस तरह जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी की बेंच ने फैजान और दूसरे आरोपी की सेक्शन 528 BNSS की अर्जी मान ली, जिसमें जौनपुर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेंडिंग चार्जशीट और उसके बाद की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी.
जौनपुर के शाहगंज थाने में दर्ज किया गया था FIR
यह पूरा मामला फैजान और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य से जुड़ा है. जौनपुर के शाहगंज थाने में 2 अप्रैल 2020 को मामले में एफआईआर दर्ज किया गया था. पुलिस ने महामारी रोग अधिनियम, 1897 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की विभिन्न धाराओं के तहत यह केस दर्ज किया था.
पूछताछ करने पर, आवेदकों ने कथित तौर पर माना कि वे धार्मिक सभा के लिए दिल्ली गए थे. उनकी मेडिकल जांच की गई और उन्हें एक क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया, जिसके बाद IPC की धारा 188, 269 और 307, डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 51(b), और एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट, 1897 की धारा 3 के तहत FIR दर्ज की गई.
बिना जानकारी के मरकज के बाद घर गए थे
पूरे मामले मेंपुलिस का आरोप था कि उसे सूचना मिली थी कि ये दोनों व्यक्ति दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज में धार्मिक जलसे में शामिल होने गए थे. लेकिन वहां से लौटने के बाद दोनों ने प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दी, और बिना कोई जानकारी के अपने परिजनों के साथ घर पर रह रहे थे. पुलिस ने इसके बाद दोनों को उन्हें क्वारंटीन सेंटर भेज दिया था.
हालांकि, कोरोना जांच में दोनों लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई. पुलिस का कहना है कि उसे आशंका थी कि दोनों कोरोना संक्रमित हो सकते हैं और अन्य लोगों में इसे फैला सकते हैं. वहीं, लेब जांच निगेटिव आने के बाद पीड़ित पक्ष ने FIR को अनुचित और बेबुनियाद बतााया और न्याय की गुहार लगाते हुए जौनपुर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.











