धमतरी में शिक्षक के निलंबन पर बवाल: शिक्षक संघ से लेकर राजनीतिक दल के नेताओं ने इस कार्रवाई पर लगाए कई गंभीर आरोप

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कुरुद: धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड के नवीन प्राथमिक शाला नारी में पदस्थ एक शिक्षक को सोशल मीडिया पर बच्चों को किताबें न मिलने और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले पोस्ट के कारण निलंबित कर दिया गया है. इसके बाद, शिक्षक संघ के अलावा विभिन्न राजनीतिक संघ संगठन ने चौतरफा विरोध करना शुरू कर दिया है. विरोध करने वालों का कहना है कि यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है और सरकार अपनी कमियों को उजागर करने वालों की आवाज़ दबा रही है.
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला है: फेडरेशन
इस कार्रवाई का छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ एव शिक्षक फेडरेशन ने कड़ा विरोध किया है, जिसे संघ के तहसील अध्यक्ष राजेश पाण्डेय ने ‘लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला‘ बताया है. उन्होंने कहा है कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाना किसी भी शिक्षक का नैतिक दायित्व है. यदि एक शिक्षक, शिक्षा विभाग की नीतियों या कार्यशैली में कमी देखता है और उसे व्यक्त करता है, तो उसे ‘गुनाह’ मानकर निलंबित कर देना, यह दर्शाता है कि शिक्षा विभाग आलोचना से डर रहा है.
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी है: तारिणी
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव तारिणी नीलम चंद्राकर ने इस निलम्बन के खिलाफ बयान जारी कर कहा है कि सरकारी नाकामी छिपाने के लिए शिक्षक को निलंबित किया गया है. यह समस्या केवल धमतरी जिले की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है, जहाँ पुस्तकें न होने से शिक्षकों को शिक्षण कार्य में कठिनाइयाँ आ रही हैं और शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक ढालूराम साहू की तत्काल बहाली और सभी बच्चों को शीघ्र पुस्तकें उपलब्ध की जाये. जब सरकार ही पुस्तकों की आपूर्ति नहीं करा पा रही है, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी है.
निलम्बन समाप्त कर शिक्षक का करे सम्मान: आप
वहीं आम आदमी पार्टी ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शिक्षक की निलम्बन तत्काल समाप्त करने एवं शिक्षक का सम्मान करने की मांग करते हुए जिलाध्यक्ष विनोद सचदेवा व तेजेन्द्र तोड़ेकर ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है. इसी कारण पालक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला करवाने विवश होते है. सरकारी नाकामियों पर पर्दा डालने एक शिक्षक को निलंबित करना न्यायोचित नही है. अगर निलम्बन जल्द से जल्द समाप्त नही किया जाता तो आगामी दिनों में वे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करेगी.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल स्कूल में किताबों की कमी को उजागर करने के लिए शिक्षक डाकू राम ने व्हाट्सएप स्टेटस लगा लिखा कि एक तरफ हम राज्योत्सव मना रहे हैं और दूसरी तरफ बच्चों को किताबें नहीं मिल रही. क्या हम राज्योत्सव मनाने लायक है? इसके साथ ही पुस्तकें नहीं मिलने पर शिक्षक से लेकर बीईओ,डीईओ,कलेक्टर और शिक्षा मंत्री का वेतन नहीं रोकने की बात भी लिखी थी. जिसे शिक्षकीय गरिमा के विपरीत मान शिक्षक को निलंबित कर दिया गया.











