कागजों में बंट गया 3 करोड़ का गेहूं-चावल और दाने-दाने को तरसे 12 गांव! उचेहरा के ‘राशन महाघोटाले’ का खौफनाक सच

मैहर :  मध्य प्रदेश के उचेहरा ब्लॉक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। बीते तीन महीनों से राशन न मिलने से परेशान ग्रामीणों का सब्र होली के पर्व पर जवाब दे गया, जिसके बाद दर्जनों ग्रामीण जल सत्याग्रह पर बैठ गए. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ को खुद पानी में उतरकर ग्रामीणों को आश्वासन देना पड़ा, तब जाकर यह विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ.

तीन महीने से खाली थे गरीबों के बर्तन
उचेहरा तहसील के अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों में हितग्राहियों को दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक का राशन नहीं मिला है.कोटेदार लगातार ‘सर्वर डाउन’ होने या ‘स्टॉक न आने’ का बहाना बनाकर ग्रामीणों को लौटा रहे थे.जब होली जैसे त्योहार पर भी घरों में अनाज नहीं पहुँचा, तो नाराज ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया.

आंदोलन की सूचना मिलते ही जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह, एसडीएम सुमेश द्विवेदी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक दोषी कोटेदारों पर कार्रवाई और राशन वितरण की गारंटी नहीं मिलती, वे पानी से बाहर नहीं आएंगे। अंततः सीईओ शैलेंद्र सिंह ने खुद गहरे पानी में उतरकर ग्रामीणों से संवाद किया और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया.

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: ₹3 करोड़ का राशन गायब ग्रामीणों द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायतों के बाद एसडीएम द्वारा गठित जांच टीम ने जब 26 उचित मूल्य दुकानों का रिकॉर्ड खंगाला, तो भ्रष्टाचार की परतें उधड़ती चली गईं। जांच में पाया गया कि कागजों और वास्तविक स्टॉक में जमीन-आसमान का अंतर है.

कुल गबन की राशि: ₹3,01,68,884
गायब खाद्यान्न: गेहूं: 4,897 क्विंटल. चावल: 4,132 क्विंटल नमक: 44 क्विंटल शक्कर: 28 क्विंटल
इन 12 गांवों में अब भी हाहाकार
प्रशासनिक सख्ती के बाद कुछ दुकानों पर वितरण शुरू तो हुआ है, लेकिन उचेहरा ब्लॉक की 12 प्रमुख दुकानों पर अब भी ताले लटके हैं या वहां वितरण ठप है. इन क्षेत्रों के हजारों हितग्राही दिसंबर से दाने-दाने को मोहताज हैं: प्रभावित क्षेत्र: आलमपुर, पिपरिया, परसमनिया, पटिहट, रामपुर पाठा, धनेह, पिथौराबाद, अटरा, ननदहा, पोड़ी, गठौत और तुषगवां.

प्रशासनिक कार्रवाई और वसूली की तैयारी
एसडीएम ने बीते 22 फरवरी को सभी 26 दोषी दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है.प्रशासन ने गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, ग्रामीणों में इस बात को लेकर अब भी रोष है कि इतने बड़े घोटाले के बावजूद अब तक दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज नहीं किया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि जांच की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.फिलहाल, प्राथमिकता उन परिवारों तक राशन पहुँचाना है जो पिछले 90 दिनों से सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं.

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