255 दिन जेल में रहे इंजीनियर को कोर्ट ने दिया इंसाफ, हत्या नहीं हादसा निकली फैक्ट्री की मौत की गुत्थी

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई की एक निजी सीमेंट फैक्ट्री में हुए मौत के मामले में बड़ा मोड़ आया है। इस केस में हत्या के आरोप में जेल भेजे गए इंजीनियर संजय तिवारी को कोर्ट ने निर्दोष करार दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन हत्या से जुड़े कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। लगभग 8 महीने यानी 255 दिन जेल में रहने के बाद यह साबित हुआ कि फैक्ट्री में हुई मौत हत्या नहीं बल्कि एक हादसा थी।

संजय तिवारी, जो सीएचपी इंचार्ज थे, पर आरोप था कि उन्होंने अपने वरिष्ठ आर. बालाराजू (एचओडी) की हथौड़े से हत्या की। पुलिस ने उन्हें 4 जून 2024 को गिरफ्तार किया और 31 अगस्त को चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, कोर्ट ने जांच में गंभीर खामियां पाईं। अभियोजन न तो खून के निशान साबित कर पाया और न ही हत्या का हथियार। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने स्पष्ट कहा कि मृतक की मृत्यु सिर में चोट और अत्यधिक रक्तस्राव से हुई, जो ऊंचाई से गिरने पर भी संभव है।

पुलिस द्वारा जब्त किए गए हेलमेट पर कोई क्षति नहीं थी, जिससे हत्या की संभावना और कमजोर हो गई। अदालत ने माना कि यह संभव है कि बालाराजू ऊंचाई से गिर गए हों, जिससे उन्हें घातक चोटें आईं। कोर्ट ने विवेचक के बयान का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती गवाहों ने भी मृत्यु को गिरने से हुई दुर्घटना बताया था।

संजय तिवारी की कॉल डिटेल से भी यह साबित हुआ कि घटना के समय वह फोन पर बात कर रहे थे और हादसे के बाद मौके पर पहुंचे थे। इन डिजिटल साक्ष्यों ने उनके निर्दोष होने की पुष्टि की।

रिहाई के बाद संजय तिवारी ने कहा कि “जिस अपराध के लिए मुझे सज़ा मिली, वो दरअसल एक हादसा था। कोर्ट ने मुझे न्याय दिया लेकिन इस दौरान मैंने सब कुछ खो दिया — परिवार, नौकरी और समाज का भरोसा।”

इस मामले ने एक बार फिर पुलिस जांच की गुणवत्ता और जल्दबाजी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत का फैसला इस बात का उदाहरण है कि सच्चाई देर से ही सही, लेकिन सामने जरूर आती है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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