बिलासपुर सिंचाई विभाग में 53 लाख का APS घोटाला: काम अधूरा, फिर भी ठेकेदार को भुगतान; अफसरों पर नियम तोड़ने का आरोप

बिलासपुर में सिंचाई विभाग में 53 लाख रुपये के APS घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर एक ठेकेदार को सुरक्षा निधि (APS) की राशि का भुगतान कर दिया, जबकि ठेकेदार ने अभी तक काम पूरा नहीं किया था। मामले के सार्वजनिक होने के बाद विभाग अब फाइनल बिल रोकने का दावा कर रहा है, लेकिन घोटाले का खुलासा कई सवाल खड़े कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, जिस निर्माण कार्य के लिए भुगतान किया गया है, वह एनीकट निर्माण से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनीकट का काम अधूरा है, जमीन पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती, फिर भी ठेकेदार ने APS राशि निकाल ली। अधिकारियों के हस्ताक्षर और मंजूरी के बिना यह संभव नहीं था, ऐसे में विभागीय मिलीभगत का आरोप मजबूत होता जा रहा है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। न तो साइट निरीक्षण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई, न ही कार्य की प्रगति का परीक्षण किया गया। इसके बावजूद बिल पास कर दिया गया। आम तौर पर APS राशि तभी जारी की जाती है जब कार्य 100% पूर्ण हो और संबंधित निर्माण गुणवत्ता परीक्षण में पास हो जाए।

फिलहाल विभागीय अधिकारी अपनी सफाई में कह रहे हैं कि फाइनल बिल फिलहाल रोक दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि यदि काम अधूरा था तो APS भुगतान कैसे और किसके आदेश पर हुआ।

मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ी है। उनका कहना है कि अधूरे काम के कारण सिंचाई के लिए अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है और अब घोटाले की खबर से यह चिंता और बढ़ गई है कि सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।

इस मामले में विभाग बड़ी कार्रवाई की बात कर रहा है, लेकिन जांच पूरी होने तक यह साफ नहीं होगा कि घोटाले में किन-किन अधिकारियों की भूमिका थी और ठेकेदार के साथ मिलीभगत किस स्तर तक हुई।

जांच टीम जल्द ही रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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