अंधेरे के खिलाफ जनक्रांति:सूरजपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्र में बिजली को लेकर उबाल, कीर्तन के बाद मुंडन

सूरजपुर : सूरजपुर जिले के वनांचल और आदिवासी बहुल क्षेत्र चांदनी बिहारपुर में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए छिड़ा जनआंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है.8 दिन से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने प्रशासन और सरकार की संवेदनहीनता को कठघरे में खड़ा कर दिया है.17 ग्राम पंचायतों के 26 आश्रित ग्रामों के लगभग 20 हजार ग्रामीण आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदारों की नींद अब तक नहीं टूटी.

कड़ाके की ठंड, सीमित साधन और प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे चुका है. आंदोलनकारी अब स्पष्ट शब्दों में कह रहे हैं—“अब आश्वासन नहीं, या तो बिजली या निर्णायक संघर्ष.” यह लड़ाई किसी दल या नेता के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकार, सम्मान और भविष्य के लिए है.
आंदोलन को झकझोर देने वाला रूप देते हुए ग्रामीणों ने पहले रामायण कीर्तन के माध्यम से शासन-प्रशासन की अंतरात्मा जगाने का प्रयास किया.

लेकिन जब वहां से भी मौन मिला तो आठवें दिन सिर मुंडवाकर विरोध दर्ज कराया गया.यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि वर्षों से दबे आक्रोश और अनसुनी पीड़ा का विस्फोट है. धरना स्थल पर तुलसीराम जायसवाल (उपसरपंच), गजमोचन सिंह (सरपंच संघ अध्यक्ष), जितेंद्र साकेत, लक्ष्मण जायसवाल, रामराज सिंह, भानुप्रताप खैरवार सहित अन्य आंदोलनकारियों ने मुंडन संस्कार कराकर सरकार को सीधी चुनौती दी और मीडिया के माध्यम से केंद्र व प्रदेश सरकार से तत्काल बिजली विस्तार कार्य शुरू करने की मांग रखी.

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र की बिजली समस्या से स्थानीय जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन और दोनों प्रमुख राजनीतिक दल भली-भांति अवगत हैं, फिर भी वर्षों से केवल फाइलें और वादे आगे बढ़ाए जा रहे हैं. ऊपर से स्थानीय भाजपा नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना और उटपटांग बयान आग में घी का काम कर रहे हैं, जिससे आंदोलन और उग्र हो गया है.आंदोलन से जुड़े युवाओं ने साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष आर-पार का होगा.

बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाएं, महिलाओं की सुरक्षा, मोबाइल नेटवर्क और रोजगार पूरी तरह ठप हैं.आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि नागरिकों को अंधेरे में जीना पड़े, तो यह शासन व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न है. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कार्ययोजना और धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी.अब देखना यह है कि सरकार जागती है या अंधेरे में सुलगता यह जनआक्रोश पूरे जिले को झकझोर देता है.

jagjaahir desk

जगजाहिर में स्पोर्ट्स बीट पर काम कर रहे हैं। स्पोर्ट्स में क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेनिस, बैडमिंटन और एथलेटिक्स गेम्स के मामलों पर काफी अच्छी पकड़ रखते हैं। हमारे पास विभिन्न मुद्दों पर लिखने का 8 साल से अधिक समय का अनुभव है। पत्रकारिता के अपने इस करियर में कई बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स जिसमें साल 2015 और 2019 और 2023 वनडे वर्ल्ड कप, आईपीएल और फुटबॉल वर्ल्ड कप को कवर किया है।
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