देश में EV मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी नई रफ्तार, बजट के इस ऐलान ने बढ़ाई चीन की चिंता!

इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और उनके पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को सरकार की ओर से स्थानीय निर्माण (लोकलाइजेशन) बढ़ाने के लिए एक और बढ़ावा मिला है. सरकार ने रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए 4 स्पेशल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है और लिथियम-आयन सेल बनाने और आयात पर मिलने वाली ड्यूटी छूट को आगे बढ़ाया है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऑटो सेक्टर की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-ऑटो) योजना का बजट सालाना आधार पर 111% बढ़ाकर ₹5,939 करोड़ कर दिया गया है, ताकि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण बढ़ाया जा सके.

EV और बैटरी स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाले लिथियम-आयन सेल बनाने के लिए PLI का बजट 45% घटाकर ₹86 करोड़ कर दिया गया है. इसकी वजह यह है कि ओला इलेक्ट्रिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और राजेश एक्सपोर्ट्स जैसी कंपनियां अपनी गीगाफैक्ट्रियों को तय समय पर पूरा नहीं कर पा रही हैं. ये फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब देश की ऑटो कंपनियों को रेयर अर्थ मैग्नेट के आयात में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही, चीन की ओर से निर्यात सब्सिडी हटाने की वजह से लिथियम-आयन सेल का आयात महंगा होने की आशंका भी है.

लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मैन्युफैक्चरर सिंपल एनर्जी के फाउंडर और CEO सुहास राजकुमार ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 मैन्युफैक्चरिंग में लोकलाइजेशन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकेत देता है. ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव भारत की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन की एक बड़ी कमजोरी को दूर करता है. हाल के वैश्विक घटनाक्रम, जैसे चीन द्वारा रेयर अर्थ के निर्यात पर पाबंदियां, यह दिखाते हैं कि जब किसी एक देश पर ज्यादा निर्भरता होती है, तो EV सेक्टर कितनी तेजी से प्रभावित हो सकता है. लिथियम-आयन बैटरी निर्माण के लिए इनपुट्स और कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी छूट जैसे कदम, देश में बड़े स्तर पर EV सप्लाई चेन तैयार करने को और मजबूत बनाते हैं. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के लिए यह सही समय पर उठाया गया कदम है.”

लिथियम-आयन पर छूट जारी

सरकार ने EV में इस्तेमाल होने वाले लिथियम-आयन सेल बनाने के लिए जरूरी मशीनरी के आयात पर जीरो कस्टम ड्यूटी को जारी रखा है. साथ ही, लिथियम-आयन सेल के आयात पर 5% की रियायती ड्यूटी भी बढ़ा दी गई है. मैन्युफैक्चरर्स का मनना है कि ये कदम EV को बढ़ावा देने में मदद करेंगे. इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के निर्माण को ज्यादा समर्थन, रेयर अर्थ के खनन और प्रोसेसिंग के लिए अलग कॉरिडोर, हाई-टेक टूल रूम की स्थापना और कंटेनर निर्माण को समर्थन देने जैसे कदम सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे और निर्यात को आसान बनाएंगे.

लिथियम-आयन सेल के लिए चीन पर निर्भरता

फिलहाल, भारत लिथियम-आयन सेल के लिए पूरी तरह चीन, दक्षिण कोरिया और जापान पर निर्भर है. इसमें से तीन-चौथाई से ज्यादा आयात चीन से होता है. CATL, BYD और Eve जैसी कंपनियां भारत में सक्रिय हैं. जापान की पैनासोनिक और दक्षिण कोरिया की LG जैसी कंपनियां भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं. चीन अगले एक साल में मौजूदा 9% निर्यात टैक्स राहत हटाने की तैयारी में है. इससे भारत में लिथियम-आयन बैटरियां महंगी हो सकती हैं और EV की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. किसी भी EV की कुल लागत में एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा बैटरी का होता है. ओला इलेक्ट्रिक फिलहाल एकमात्र कंपनी है जिसने लिथियम-आयन सेल की जरूरत का कुछ हिस्सा देश में ही तैयार किया है. JSW, रिलायंस, टाटा एग्राटास, एक्साइड और अमारा राजा जैसी कंपनियों ने 2030 तक 100 GWh से ज्यादा क्षमता की गीगाफैक्ट्रियां लगाने का वादा किया है.

jagjaahir desk

जगजाहिर में स्पोर्ट्स बीट पर काम कर रहे हैं। स्पोर्ट्स में क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेनिस, बैडमिंटन और एथलेटिक्स गेम्स के मामलों पर काफी अच्छी पकड़ रखते हैं। हमारे पास विभिन्न मुद्दों पर लिखने का 8 साल से अधिक समय का अनुभव है। पत्रकारिता के अपने इस करियर में कई बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स जिसमें साल 2015 और 2019 और 2023 वनडे वर्ल्ड कप, आईपीएल और फुटबॉल वर्ल्ड कप को कवर किया है।
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