आईएलएस हॉस्पिटल्स रायपुर में बड़ी उपलब्धि, 8 महीने में 5 सफल किडनी ट्रांसप्लांट

रायपुर। आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। अस्पताल की शुरुआत के सिर्फ आठ महीनों के भीतर पाँच किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) सफलतापूर्वक किए गए हैं। सभी मरीज और किडनी देने वाले परिजन पूरी तरह स्वस्थ हैं और प्रत्यारोपित किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ये सभी ट्रांसप्लांट लिविंग डोनर के माध्यम से किए गए, जिनमें मरीजों के करीबी पारिवारिक सदस्य जैसे पति-पत्नी और माता-पुत्र शामिल थे। गोपनीयता नियमों के तहत डोनर और मरीजों की पहचान उजागर नहीं की गई है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस है अस्पताल

आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर में 4 बेड की विशेष रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट, अत्याधुनिक क्लास-100 ऑपरेशन थिएटर और ऑर्गन पास बॉक्स जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इतनी कम अवधि में पाँच सफल किडनी ट्रांसप्लांट होना अस्पताल की मजबूत चिकित्सा क्षमता को दर्शाता है।

आईएलएस हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीओओ डॉ. विशाल गोयल ने कहा कि आईएलएस समूह मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों पर लगातार निवेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि मई 2025 में शुरू हुआ आईएलएस हॉस्पिटल्स, रायपुर आईएलएस समूह का पाँचवां अस्पताल है और शहर के लोगों का भरोसा तेजी से जीत रहा है।

अब तक 7 हजार से ज्यादा मरीजों को मिला इलाज

अस्पताल के सीओओ डॉ. सौरभ चोरड़िया ने बताया कि 11 मई 2025 से अब तक करीब 250 दिनों में अस्पताल ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। अब तक

5 सफल किडनी ट्रांसप्लांट

7,000 से अधिक मरीजों का इलाज

400 से ज्यादा सर्जरी

600 से अधिक कैथ लैब प्रक्रियाएं

340 से ज्यादा गैस्ट्रो प्रक्रियाएं

1,000 से अधिक डायलिसिस सत्र
पूरे किए गए हैं।

अनुभवी डॉक्टरों की टीम कर रही इलाज

किडनी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. करण सराफ (नेफ्रोलॉजिस्ट) कर रहे हैं, जबकि सर्जरी की जिम्मेदारी डॉ. राहुल कपूर (यूरोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जन) निभा रहे हैं। इनके साथ एनेस्थेटिस्ट, आईसीयू विशेषज्ञ, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की अनुभवी टीम काम कर रही है।

डॉ. करण सराफ ने बताया कि अब तक किए गए सभी ट्रांसप्लांट पूरी तरह सफल रहे हैं। मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस की तुलना में बेहतर और लंबे समय तक राहत देने वाला इलाज है।

कम दर्द और जल्दी रिकवरी

डॉ. राहुल कपूर ने बताया कि डोनर की किडनी निकालने की प्रक्रिया लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई, जिससे कम दर्द होता है और जल्दी रिकवरी होती है। आमतौर पर डोनर को 2–3 दिनों में छुट्टी दे दी जाती है। ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को विशेष रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट में रखा जाता है, जहां संक्रमण से बचाव के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है।

कानून के तहत और जागरूकता पर भी जोर

सभी किडनी ट्रांसप्लांट मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के तहत अधिकृत समिति की अनुमति के बाद किए गए हैं। इसके साथ ही आईएलएस हॉस्पिटल्स रायपुर लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है।

अस्पताल का उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को बाहर जाए बिना उच्च गुणवत्ता की किडनी ट्रांसप्लांट और अन्य सुपर स्पेशलिटी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकें।

close