ईरान ने अमेरिका के सामने झुकने से किया इनकार, शांति समझौते पर बढ़ा संकट

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन ने अमेरिका के साथ जारी बातचीत के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उनका देश किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और यूरोप ने ईरान के खिलाफ अविश्वास की दीवार खड़ी कर दी है, जिससे शांति समझौते की राह मुश्किल हो गई है।
तेहरान में दिए गए बयान में पजेशकियन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि मौजूदा हालात में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल हो पाएगी। परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता का पहला चरण ओमान में हुआ था, लेकिन अब इस पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
राष्ट्रपति ने जनता से संवाद करते हुए बीते 47 वर्षों की चुनौतियों का जिक्र किया और कहा कि कई बार ईरान को कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन देश कभी नहीं टूटा। उन्होंने कुछ आंतरिक कमियों को स्वीकार करते हुए आम नागरिकों से माफी भी मांगी।
पजेशकियन ने दोहराया कि ईरान किसी भी तरह के परमाणु हथियार का निर्माण नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया चाहे तो इसकी जांच भी कर सकती है। उनके मुताबिक, परमाणु हथियार बनाने के आरोप पूरी तरह गलत हैं और इन्हीं के आधार पर ईरान पर अनुचित शर्तें थोपी जा रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अगर इजराइल के दबाव में ईरान पर नई शर्तें लागू करने की कोशिश करेगा, तो उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे इसके चलते बातचीत क्यों न टूट जाए। यह बयान लंबी दूरी की मिसाइलों से जुड़ी शर्तों के संदर्भ में दिया गया माना जा रहा है।
इजराइल का कहना है कि भविष्य में ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें न बनाए, इसे समझौते में शामिल किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी नेतृत्व से बातचीत भी की है।
अपने संबोधन में पजेशकियन ने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और कुछ ताकतें देश के खिलाफ साजिश कर रही हैं। ऐसे में सभी को सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के नेतृत्व में एकजुट रहना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान शांति चाहता है और एक उन्नत राष्ट्र बनना चाहता है, लेकिन अगर युद्ध थोपा गया तो देश पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि ईरानी जनता के धैर्य और एकता से ही देश हर चुनौती का सामना करेगा।











