डीडवाना-कुचामन के डॉ. अनिल शर्मा ने रचा इतिहास: भारत का पहला गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन ऑपरेशन सफल

डीडवाना-कुचामन: राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के बेगसर गांव के मूल निवासी सर्जन डॉ. अनिल शर्मा और उनकी टीम ने एक ऐसी जटिल सर्जरी को सफल अंजाम दिया है, जिसे चिकित्सा जगत में भारत का पहला और दुनिया का मात्र छठा मामला माना जा रहा है. इस उपलब्धि ने न केवल जिले बल्कि पूरे देश का नाम वैश्विक मेडिकल साहित्य में दर्ज करा दिया है.
क्या था मामला?
किशनगढ़ की एक मार्बल फैक्ट्री में कार्यरत 29 वर्षीय मजदूर नुरसेद पर पत्थरों से लदी भारी ट्रॉली गिर गई. हादसा इतना भीषण था कि उसका आमाशय (पेट) पूरी तरह दो हिस्सों में कट गया. इसके साथ ही शरीर के भीतर भारी रक्तस्राव, आठ पसलियां टूटी हुई, कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर और कई अंदरूनी अंगों को गंभीर चोटें आईं. सीटी स्कैन में आमाशय पूरी तरह फटा हुआ मिला, जबकि तिल्ली और किडनी भी क्षतिग्रस्त थीं.
असंभव को संभव बनाया
अजमेर के सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में लाई गई इस गंभीर स्थिति में सर्जिकल और एनेस्थीसिया टीम ने तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया. ऑपरेशन के दौरान पेट में अत्यधिक रक्त भरा मिला और आमाशय आगे से पीछे तक पूरी तरह गोलाई में फटा हुआ था. टीम ने अत्यंत सावधानी से आमाशय को जोड़कर छोटी आंत में न्यूट्रिशन ट्यूब डाली. ‘गोल्डन आवर’ में मिले ट्रॉमा केयर के कारण मरीज की जान बचाई जा सकी। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है.
डॉ. अनिल शर्मा के अनुसार, ट्रॉमा के कारण गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन का यह भारत में पहला दर्ज मामला है, जबकि विश्व में अब तक केवल छह बार इस प्रकार की सर्जरी हुई है.

मेडिकल टीम की भूमिका
इस ऐतिहासिक सर्जरी में डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. पूर्णिमा सागर, डॉ. मेहुल सिंघल, डॉ. नमन सोमानी, डॉ. विपिन दीप सिंह, डॉ. कुलदीप, डॉ. ज्योति और डॉ. एकता शामिल रहे. पूरी टीम ने समन्वय और धैर्य के साथ यह जटिल ऑपरेशन सफल किया.
डॉक्टरों के लिए संदेश
डॉ. अनिल शर्मा ने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घबराने के बजाय प्रशिक्षण और इच्छाशक्ति पर भरोसा रखना चाहिए. “मरीज जब आपके पास जिंदा आता है, तो पूरी कोशिश करनी चाहिए. अगर आप हिम्मत नहीं करेंगे तो मरीज को बचाने का मौका भी नहीं मिलेगा,” उन्होंने कहा.
सरकारी अस्पतालों पर भरोसा
डॉ. शर्मा ने राजस्थान सरकार का आभार जताते हुए कहा कि आधुनिक उपकरणों और बेहतर सुविधाओं के कारण आज सरकारी अस्पतालों में जटिल से जटिल ऑपरेशन संभव हो पा रहे हैं. यदि यही सर्जरी निजी अस्पताल में होती तो 10 लाख रुपये से अधिक खर्च हो सकता था, जबकि यहां पूरा इलाज निशुल्क हुआ. उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी गंभीर बीमारी या हादसे में सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करें, जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.
यह सफलता न केवल चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा और ‘गोल्डन आवर’ में सही इलाज की अहमियत को भी बताती है.











