होलिका दहन के एक दिन पहले कंटेनर में छिपाकर किया अफीम की बीज का परिवहन, बाउंसर करते थे खेतों की सुरक्षा, बच्चों ने ऐसे किया खुलासा…

समोदा गांव में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार की खेत में अफीम की अवैध खेती की चर्चा पूरे प्रदेश में है. चाहे वह सत्ता पक्ष के नेता-कार्यकर्ता हों, या फिर विपक्ष के नेता-कार्यकर्ता, या फिर आमजन सभी प्रदेश में पहली बार सामने आई अफीम की खेती को लेकर चर्चा कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मामले का खुलासा समोदा गांव के चंद चंचल-चपल बच्चों की वजह से हुआ.
गांव वाले बताते हैं कि होलिका दहन के लिए गांव के बच्चे घूम-घूमकर लकड़ी इकट्ठा कर रहे थे. इस दौरान नदी किनारे स्थित विनायक ताम्रकार की खेत में चनाबूट लगे होने उम्मीद से घुस गए. चनाबूट तो नहीं मिला, लेकिन मक्के की फसल के बीच अफीम के अनोखे बीज ने बच्चों को सहज ही आकर्षित किया. पहली बार अफीम की फसल को देख रहे बच्चों ने चंद कच्चे-पक्के फल तोड़कर खेत से बाहर निकल गए. बाद में बच्चों ने फल ग्रामीणों को दिखाया.
ग्रामीण भी फल देखकर अचंभित हुए, इंटरनेट पर फोटो के जरिए सर्च किया, जिसमें अफीम होने की पुष्टि हुई. इस बात की जानकारी सरपंच अरुण गौतम को हुई, और उन्होंने पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस की छापेमारी में प्रदेश में पहली अफीम की अवैध खेती का खुलासा हुआ. इसके बाद सियासी रंग चढ़ गया. हालांकि, अभी मामले में खेती करने वाले दो राजस्थान के रहवासियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, लेकिन जल्द ही बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है.
कंटेनर में कपास के बीच हुआ था अफीम का परिवहन
जानकार बताते हैं कि विनायक ताम्रकार के खेतों में होली के एक दिन पहले खेत में एक कंटेनर पहुंचा था, जिसमें कपास के बीच में अफीम के बीजों का परिवहन किया गया था. कपास की वह फसल है, जिसकी खेती के लिए राजस्थान के लोगों को बुलाने की बात कही जा रही है. अब यह अफीम कंटेनर में रुई के बीच कहां परिवहन किया गया, इसका जवाब हिरासत में लिए गए संदेहियों से पूछताछ के बाद होगा. लेकिन 9 एकड़ में स्वाभाविक तौर पर अफीम की अच्छी-खासी खेती होती होगी, जिसके हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ में तब्दील करने के लिए आस-पास के क्षेत्र में जरूर कारखाना भी होगा.
खेतों की सुरक्षा के लिए लगाए गए थे बाउंसर
जानकार बताते हैं कि खेतों में फसल की सुरक्षा के लिए बाउंसर लगाए गए थे. सुनने में यह बात अटपटी लग सकती है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि वाकई में ऐसा था. और यदि बात अफीम की खेती की हो तो यह तर्कसंगत लगने लगता है. बताया जा रहा है कि जिन दिन बच्चे खेत में घुसे थे, उस दिन ग्रामीणों ने गोली चलने की आवाज भी सुनी गई थी. आशंका जताई जा रही है कि बाउंसरों ने बच्चों को डराने के लिए फायरिंग की होगी. ये बाउंसर पुलिस के खेतों में घुसने से पहले ही गधे के सिर से सिंग की तरह मौके से गायब हो गए.
पुलिस की जांच पर अब लोगों की लगी निगाहें
दुर्ग पुलिस के लिए अफीम की खेती की जांच एक चुनौती की तरह है. अफीम का यह कारोबार केवल समोदा के खेतों तक ही सीमित नहीं है. जानकार मानते हैं कि अफीम से हेरोइन तक का सफर दुर्ग जिले के भीतर तक सीमित नहीं हो सकता है. इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क होगा. भाजपा नेता के मामले से तार जुड़ने से एक अलग एंगल है. भले ही पार्टी का कोई संबंध न हो, लेकिन माना जा रहा है कि भाजपा नेता ने जरूरी अपनी पहुंच का फायदा उठाया होगा. पुलिस की जांच समोदा के खेतों से बाहर निकलकर जहां तक जाए, एक नई जानकारी लेकर सामने आएगा.










