टैक्सपेयर्स को भेजे गए एडवांस टैक्स रिमाइंडर में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

आयकर रिटर्न और टैक्स से जुड़ा कोई भी ईमेल जब इनबॉक्स में आता है, तो एक आम करदाता का परेशान होना स्वाभाविक है. खासकर तब, जब बात किसी बड़े लेनदेन की हो. हाल ही में देश भर के कई टैक्सपेयर्स के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. उन्हें आयकर विभाग की ओर से असेसमेंट ईयर 2026-27 (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए ‘महत्वपूर्ण लेनदेन’ (Significant Transactions) का हवाला देते हुए एक ऑटोमेटेड ईमेल मिला. इस भारी-भरकम शब्दों वाले मैसेज ने कई नौकरीपेशा और व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दीं. लेकिन अगर आपको भी ऐसा कोई संदेश प्राप्त हुआ है, तो अब घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आयकर विभाग ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि इन ईमेल्स में दी गई लेनदेन की जानकारी पूरी तरह से गलत थी.

ईमेल में क्या था जिसने बढ़ाई टैक्सपेयर्स की धड़कनें?

दरअसल, आयकर विभाग इन दिनों एडवांस टैक्स ई-कैंपेन चला रहा है. इस अभियान के तहत लोगों को उनके द्वारा किए गए बड़े वित्तीय लेनदेन की याद दिलाई जाती है ताकि वे समय पर अपना एडवांस टैक्स जमा कर सकें. इसी ऑटोमेटेड प्रक्रिया के दौरान एक बड़ी तकनीकी गड़बड़ी सामने आई. नतीजतन, कई करदाताओं के पास उनके वित्तीय लेनदेन को लेकर ऐसे आंकड़े और डिटेल्स पहुंच गए, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं था. इस गलती के कारण उन लोगों में भी दहशत फैल गई, जिनका टैक्स रिकॉर्ड बिल्कुल साफ-सुथरा है और जिन्होंने नियम से अपना सारा टैक्स चुकाया है. करदाताओं की त्वरित प्रतिक्रिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत इस पर संज्ञान लिया है.

विभाग की ओर से जारी हुई जरूरी सफाई

गलत जानकारी वाले इस ईमेल के फैलने के बाद, टैक्स विभाग ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है. उन्होंने करदाताओं द्वारा इस त्रुटि को तुरंत ध्यान में लाने के लिए उनका धन्यवाद किया है और इस पूरी असुविधा के लिए खेद भी जताया है. विभाग ने यह साफ कर दिया है कि वे इस तकनीकी खामी को हमेशा के लिए दूर करने के लिए अपने सर्विस प्रोवाइडर के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टैक्सपेयर्स से सीधी अपील की गई है कि वे असेसमेंट ईयर 2026-27 के एडवांस टैक्स ई-कैंपेन से जुड़े उस पिछले भ्रामक ईमेल को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दें. उस ईमेल के आधार पर कोई भी कदम उठाने की जरूरत नहीं है.

क्यों भेजे जाते हैं ये ई-कैंपेन वाले मेल?

लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठ सकता है कि जब जानकारी गलत ही थी, तो ये मैसेज सिस्टम से जनरेट ही क्यों किए गए? इस पर विभाग का रुख स्पष्ट है. उनका कहना है कि ऐसे संवाद किसी को डराने, नोटिस भेजने या परेशान करने के लिए नहीं होते. इनका मुख्य उद्देश्य केवल एक पारदर्शी सुविधा प्रदान करना है. यह करदाताओं के लिए एक रिमाइंडर की तरह काम करता है, ताकि वे समय रहते कंप्लायंस पोर्टल पर जाकर अपनी वित्तीय जानकारी की समीक्षा कर सकें. अगर उनके लेनदेन के आधार पर उन पर कोई एडवांस टैक्स देनदारी बनती है, तो वे अंतिम समय की आपाधापी और पेनाल्टी से बचते हुए उसे चुका सकें.

close